टाइगर रिजर्व की बराही रेंज में बड़े पैमाने पर खस घास निकाले जाने का मामला सामने आया है। केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने इस पर नाराजगी व्यक्त करते हुए डीएम से कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद हरकत में आए डीएफओ कैलाश प्रकाश ने कार्रवाई शुरू करते हुए रेंजर सहित तीन का स्पष्टीकरण तलब किया है।
टाइगर रिजर्व बनने के बाद आम आदमी की जंगल में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया। इसकी आड़ में लकड़ी कटान, मछली का शिकार, घास, नरकुल, बेंत, सेंटा निकासी आदि के काम अवैध रूप से चल रहे हैं। अब नया मामला खस निकासी का सामने आया है। बराही रेंज के कंपार्टमेंट 73 में बड़े पैमाने पर खस घास को एकत्र किया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो इस धंधे में जुटे लोगों ने बाकायदा झोपड़ी डालकर आशियाना बना रखा है और लगभग 10 परिवार यहां रुके हुए हैं। इसकी शिकायत कुछ लोगों ने उच्चाधिकारियों से की। वहीं शनिवार को जिला पंचायत के कार्यक्रम में पहुंची केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी के सामने भी इस मामले को रखा गया। जंगल के अंदर से खस घास की जानकारी होने पर केंद्रीय मंत्री ने नाराजगी व्यक्त की और डीएम शीतल वर्मा से वार्ता कर कार्रवाई के निर्देश दिए। डीएम ने डीएफओ कैलाश प्रकाश से प्रकरण की जानकारी लेकर जांच के निर्देश दिए। मामला केंद्रीय मंत्री और डीएम तक पहुंचने पर डीएफओ ने बराही रेंजर अनिल शाह, सेक्शन अधिकारी मोबीन आरिफ, बीट प्रभारी संदीप का स्पष्टीकरण तलब किया है।
पिछले कई माह से चल रहा था धंधा
टाइगर रिजर्व की बराही रेंज से खस निकालने का धंधा पिछले कई माह से चल रहा है। सूत्रों मानें तो तक कई ट्रक खस जंगल से निकाली जा चुकी है जबकि एक ट्रक खस की कीमत लगभग दो से ढाई लाख तक होती है। टाइगर रिजर्व में अवैध धंधे का यह पहला मामला नहीं हैं। आम आदमी के जंगल में प्रवेश पर प्रतिबंध के बाद से बेधड़क होकर कटान व मछली शिकार हो रहा है। लगभग आठ माह पूर्व महोफ रेंज में लकड़ी कटान मामले में वन संरक्षक ने अपनी टीम भेजकर जांच कराई थी। इसके बाद से ही रेंजर को बदल दिया। वहीं बराही रेंज में बेंत निकासी का मामला भी प्रकाश में आया था।
जानकारी मिलने पर मौके पर जाकर निरीक्षण किया था जिसमें कुछ घास कटी मिली थी जिसके खिलाफ विभागीय केस भी काटा गया है। इस मामले में रेंजर सहित तीन का स्पष्टीकरण तलब किया गया।
कैलाश प्रकाश, डीएफओ