अमरिया क्षेत्र में तीन लोगों की जान लेने वाले खूनी बाघ को पकड़ने के लिए वनविभाग द्वारा लगाए गए पिंजरे फिर खाली रह गए। पिंजरों में रखे गए मीट को खाने बाघ नहीं पहुंचा। शुक्रवार को पूरे दिन वनकर्मी बाघ की तलाश में जुटे रहे लेकिन कोई लोकेशन भी नहीं मिली। वनकटी से निकलकर कचहरी होता हुआ एक बाघ देवहा नदी पार कर अमरिया और जहानाबाद क्षेत्र में पहुंच गया था। इस बाघ ने सात, आठ एवं दस अगस्त को तीन किसानों को मार डाला था। इसके बाद से ही वनविभाग बाघ को पकड़ने की कोशिश में जुटा है लेकिन बाघ हत्थे नहीं चढ़ रहा है। मुख्यमंत्री योगी के आगमन से पूर्व ही वनविभाग ने अभियान तो तेज कर चार हाथियों के साथ टीमों को लगाया था। दो पड्डे भी बांधे गए जिन्हें बाघ ने मार डाला लेकिन वनविभाग को बाघ की लोकेशन फिर भी नहीं मिली। अधिकारियों के निर्देश पर जिन स्थानों पर बाघ ने पड्डों को मारा था उन स्थानों पर पड्डों का मांस रखकर पिंजरे लगाए गए थे। वनविभाग को बाघ केे इन पिंजरों तक पहुंचने की पूरी उम्मीद थी। शुक्रवार सुबह वनविभाग की टीमें जाल आदि की व्यवस्था कर पिंजरों का निरीक्षण करने पहुंची लेकिन पिंजरे खाली मिले। लेकिन पिंजरे से हटकर दूसरे स्थान पर बांधे गए एक अन्य पड्डे को बाघ ने मार डाला। इसके अलावा आसपास लगाए गए कैमरों में भी बाघ की दो फोटो आई है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि बाघ जल्द ही पकड़ा जाएगा। डीएफओ आदर्श कुमार ने बताया कि पड्डे मारने के बाद बाघ के लौटने की पूरी उम्मीद थी लेकिन वह नहीं आया। दूसरे स्थान पर पड्डे के मारने और कैमरे में फोटो आने से यह स्पष्ट है कि वह आसपास ही मौजूद है। पिंजरे लगाने के साथ ही टीम को भी विशेष निगरानी के निर्देष दिए गए हैं। उम्मीद है बाघ बेहोश कर को जल्द पकड़ लिया जाएगा।