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वन विभाग के दावे पर कोर्ट की मोहर

Mon, 03 Aug 2015 11:24 PM IST
Madotanda
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टाइगर रिजर्व के नौजल्हा क्षेत्र में वन भूमि पर कब्जा करने के मामले में सिविल जज की अदालत में चल रहे मुकदमे में वन विभाग के हक में फैसला हुआ है। इसमें वन विभाग ने 39 लोगों के खिलाफ विभागीय मुकदमा दर्ज किया था।
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नौजल्हा में शारदा नदी के कटान के बाद करीब 38 परिवारों ने राजस्व विभाग से सुरक्षित बसाने की मांग की थी। इसके बाद बूदीभूड़ ग्राम पंचायत में राजस्व विभाग व प्रधान के सहयोग से 38 परिवारों को नौजल्हा क्षेत्र में जिस स्थान पर बसाया गया था टाइगर रिजर्व के डीएफओ कैलाश प्रसाद ने उसको अपने टाइगर रिजर्व के कोर एरिया की भूमि बताते हुए वहां न बसने की हिदायत दी थी। मगर बाद में राजस्व विभाग इस मामले में आड़े आ गया। उसने ग्राम समाज की भूमि बताते हुए लोगों को वहां बसा दिया। इसको लेकर कई बार संयुक्त सीमांकन हुआ। उस दौरान वन और राजस्व विभाग अपना दावा करते रहे। पुलिस के सहयोग से वन अधिकारी ने अतिक्रमणकारियों को हटाने का प्रयास किया तो महिलाओं ने लाठी डंडे लेकर सभी को खदेड़ दिया था। इसके बाद डीएफओ ने 38 परिवारों के मुखिया समेत 39 लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था। इधर अतिक्रमणकारी भी सिविल जज सीनियर डिवीजन की कोर्ट में चले गए थे। कोर्ट ने इस मामले में पहले वन विभाग से जवाब दाखिल करने को कहा। जब वन विभाग ने अपना दावा पेश कर अभिलेखों सहित जवाब दाखिल किया तो अदालत ने राजस्व विभाग को नोटिस देकर चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए थे। मगर चार माह से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी राजस्व विभाग को कोई जवाब दाखिल नहीं कर सका। इसके बाद अदालत ने निताई द्वारा दर्ज किया मुकदमा वन विभाग के हक में खारिज कर दिया। क्षेत्रीय डिप्टी रेंजर रामचंद्र लाल ने बताया कि 39 अतिक्रमणकारियों के खिलाफ चल रहा मुकदमे का फैसला वन विभाग के हक में हो गया है और शीघ्र ही अधिकारियों के दिशा निर्देशन में अवैध कब्जे हटाने की कार्रवाई की जाएगी। इधर मुकदमा वन विभाग के हक में होने के बाद दूसरा पक्ष बेदखली के भय से हाईकोर्ट जाने की तैयारी में जुट गया है।
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