टाइगर रिजर्व के बाद लखीमपुर से संबद्ध वन निगम कार्यालय के खाली भवन में टाइगर रिजर्व का गेस्ट हाउस बन सकता है। इसके लिए वन निगम कार्यालय भवन एवं कॉलोनी का जल्द ही वन विभाग को हस्तांतरण किया जाएगा।
टाइगर रिजर्व बनने से पहले पीलीभीत के जंगलों में कटान और लकड़ी निकासी वन निगम के माध्यम से होती थी। जिले में माला, पूरनपुर सहित कई डिपो होने के साथ ही शहर में आवास विकास में डीएलएम और डीएसएम कार्यालय थे। साथ ही कांशीराम कॉलोनी के निकट लगभग 15 आवासों की कॉलोनी भी है। नौ जून 2014 को टाइगर रिजर्व बनने के बाद जिले से वन निगम को भी समाप्त कर कार्यालय और स्टाफ को लखीमपुर वन निगम से संबद्ध कर दिया गया। वन निगम के लखीमपुर जाने से इसका कार्यालय भवन एवं कॉलोनी खाली हो गई है। पहले निगम अधिकारी इसे नीलाम करने के प्रयास में थे लेकिन शासन ने इसकी अनुमति न देकर वन विभाग के भवन, कॉलोनी एवं अन्य जमीन वन विभाग को हस्तांरित करने के निर्देश दिए थे। शासन से मुख्य वन संरक्षक के माध्यम से डीएफओ को पत्र मिला है। इसमें डीएफओ से वन निगम के खाली आवास और कॉलोनी का हस्तांतरण करने की सहमति मांगी गई है।
बन सकते हैं बेहतर गेस्ट हाउस
टाइगर रिजर्व बनने के साथ ही बाहर से आने वाले पर्यटकों के रात्रि विश्राम के लिए शहर में कोई विभागीय गेस्ट हाउस न होने से दिक्कत आ रही थी। सूत्रों की मानें तो शासन ने इसी लिहाज से वन निगम के खाली कार्यालय को टाइगर रिजर्व के सुपुर्द करने का निर्णय लिया है। यदि ऐसा होता है तो टाइगर रिजर्व आने वालों को काफी सुविधा होगी।
यह संपत्तियां होगी हस्तांतरित
-एमआईजी के पांच आवासों में चल रहा वननिगम कार्यालय
-कांशीराम कॉलोनी के निकट 15 आवासों की कॉलोनी
-एकता सरोवर के निकट 400 गज का प्लाट
वन निगम के खाली कार्यालय और आवास को वन विभाग को हस्तांरित करने के संबंध में पत्र आया है। एक दो दिन में स्थलीय निरीक्षण के बाद शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
-कैलाश प्रकाश, डीएफओ, टाइगर रिजर्व