माधोटांडा। शारदा डैम समेत नहरों में अब चार माह तक मछली का शिकार पर प्रतिबंध रहेगा। प्रजनन काल होने के चलते सरकारी जलाशयों एवं नहरों में मछली के नीलामी में ठेके की अवधि तीस जून के बाद स्वत: ही समाप्त हो जाती है। जिसके चलते मछली ठेकेदार ने डैम में शिकार के लिए डाली गई नावों को भी बाहर निकाल लिया हैं। करीब 22 किमी लंबा शारदा सागर डैम में मछली का नीलामी ठेका तीन साल के लिए किया जाता था। इसकी नीलामी उत्तर प्रदेश मत्स्य निगम करता है। इधर तीस जून से मछली का प्रजनन काल शुरू हो जाता है और 15 सितंबर तक मछली के शिकार खेलने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया जाता है। यही नहीं इस दौरान ठेकेदार को विभागीय नियमों के मुताबिक करीब एक करोड़ मछली का बच्चा हर साल छोड़ना पड़ता है। इधर एक जून से शारदा डैम में मछली के शिकार पर प्रतिबंध लग गया है। ठेकेदार ने मछली का शिकार के लिए डैम में डाली गई दर्जनों नावों को पानी से बाहर निकाल लिया गया है। नावों को मछली डिपो पर रख दिया गया। ठेकेदार प्रतिनिधि गुड्डू ने बताया कि मछली के शिकार पर 15 सितंबर तक प्रतिबंध तो रहेगा लेकिन ठेके की अवधि तीन साल तक होने के चलते प्रजनन काल के दौरान मछली का अवैध शिकार न हो सके, इसके लिए अपने स्तर से निगरानी करेंगे। इसके अलावा मत्स्य निगम की भी इस पर नजर रख रहा है।
नहरों में भी लगा मछली शिकार पर प्रतिबंध
इधर मछलियों के प्रजनन काल के चलते डैम में ही नहीं बल्कि सिंचाई विभाग की नहरों में भी मछली शिकार पर प्रतिबंध लग गया है। वह भी जुलाई से लागू हो गया है। नहर विभाग के सहायक अभियंता नरेश चंद्र पंत ने बताया कि मछली का नीलामी ठेका वैसे तो एक लाख 90 हजार में अगले वर्ष के लिए भी हो गया है, लेकिन विभागीय शर्तों के मुताबिक तीस जून से सितंबर तक शिकार पर प्रतिबंध रहेगा। इसके बाद विभागीय अफसरों की अनुमति के बाद ही शिकार कराया जा सकता है।
चोरी छिपे जारी है अवैध शिकार
प्रजनन काल शुरू होते ही विभागीय शर्तों के मुताबिक शारदा डैम व नहरों में तो मछली का शिकार पर प्रतिबंध लग गया है, लेकिन इसके बावजूद टाइगर रिजर्व के अंतर्गत गुजरने वाले शारदा नदी पर शिकार जारी है। शिकारी चोरी छिपे छोटी-छोटी नावों के मछली का शिकार करने में जुटे है। ऐसा तब है जब टाइगर रिजर्व ने चार साल पूर्व से ही जंगल क्षेत्र में नीलामी पर प्रतिबंध लगा दिया है।