किसानों ने निजी खर्चे से शुरू की तार फैंसिंग
टाइगर रिजर्व प्रशासन की आस छोड़कर किसानों ने निजी खर्चे पर खेतों में पावर तार फैंसिंग करानी शुरू कर दी है। जबकि वन विभाग द्वारा लगाई गई तार फैंसिंग के तारों में झाड़ियों व पेड़ों की टहनियां लगने से करंट प्रवाहित नहीं हो रहा है। इससे फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले वन्यजीव बाहर निकल रहे हैं। जंगल से सटे इलाके में फसलें पैदा करना एक बड़ा जोखिम भरा काम हो गया है। टाइगर रिजर्व बनने के बाद वन्यजीव हरे चारे की तलाश में शाम होते ही जंगल की बाउंड्री से सटे इलाकों में पहुंच जाते हैं। जंगली सुअर व नीलगाय भी बड़े पैमाने पर नुकसान कर रहे हैं। टाइगर रिजर्व बनने से वन्यजीवों की संख्या बेतहाशा बढ़ गई है। किसानों ने अपनी फसलों की देखरेख को रखवाले रखे हैं। साथ ही कई किसान स्वयं फसलों की रखवाली करते हैं। वन्यजीवों के फसलों में आने से बाघ भी शिकार की तलाश में आ जाते हैं। जानकारों के मुताबिक बाघ के मैदानी इलाके में आने से मनुष्यों पर हमलों की घटनाएं बढ़ रही है। इधर, किसानों ने अपनी फसलों को बचाने के लिए निजी खर्च पर खेतों पर तार फैंसिंग करानी शुरू कर दी है। बराही के हरचरन सिंह समेत कुछ किसानों ने अपने खेतों के चारों ओर लंबी बाउंड्री बनाई दी है। हल्दीडेंगा क्षेत्र में किसानों ने वन्यजीवों से अपनी फसलें बचाने को सोलर तार फैंसिंग करानी शुरू की है। उसकी मुख्य वजह जंगल क्षेत्र की सीमा पर लाखों रुपये की कराई गई तार फैंसिंग कई स्थानों पर ठप पड़ी है। जंगल से सटे इलाके के किसान बताते हैं कि तार फैंसिंग के तारों में हरे पत्ते व टहनियां टकराती रहती है। ऐसे में करंट का प्रवाह कम हो जाता है और वन्यजीव आसानी से कृषि फसलों तक पहुंच जाते हैं। हालांकि धोखे से कहीं कोई जंगली जानवर मर जाए तो उसका भारी भरकम जुर्माना देना पड़ता है। इसी डर के चलते रखवाले भी काम करने से कतराते हैं।