पीलीभीत। धीमी तौल और कमी बताकर क्रय केंद्रों से धान निरस्त किए जाने पर गुस्साए किसानों ने हंगामा कर दिया। मंडी समिति का गेट बंद करके किसान धरने पर बैठ गए। क्रय केंद्रों पर वसूली के भी आरोप लगाए। अफसरों की गाड़ियों का भी मंडी में प्रवेश नहीं होने दिया। एसडीएम और तहसीलदार ने पहुंचकर किसानों को नियमानुसार खरीद का भरोसा दिलाया। करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद हंगामा शांत कराया जा सका।
धान खरीद में किसानों को फसल का वाजिब दाम दिलाने के लिए शासन-प्रशासन भले ही तमाम प्रयास कर रहा हो, मगर मंडियों में किसानों की समस्याएं कम नहीं हो सकी है। कई दिन के इंतजार के बाद तौल का नंबर आते ही कमी बताकर किसानों का धान निरस्त कर दिया गया। महीन धान की खरीद को लेकर भी कोई इंतजाम नहीं किए जा सके हैं। कोई संतोषजनक जवाब न मिलने पर सोमवार दोपहर मंडी समिति में किसान आक्रोशित हो गए। दर्जनों किसान एकत्र हुए और मंडी समिति का मुख्य द्वार बंद करके जमीन पर धरना शुरू कर दिया। उनका आरोप था कि धान में किसी तरह की कमी नहीं है। सिर्फ केंद्रों पर सुविधा शुल्क न दिए जाने पर निरस्त कर दिया जा रहा। अगर धान खराब था तो 20-20 दिन तक किसानों को इंतजार क्यों कराया गया? उसी वक्त कमी बता दी जानी चाहिए थी। एक बार में 60 क्विंटल खरीद किए जाने पर भी दिक्कतों का हवाला दिया। समस्या का समाधान होने तक मंडी गेट पर धरना देने का ऐलान कर दिया। इसकी सूचना मिलने पर एसडीएम रामदास, तहसीलदार विवेक मिश्रा, इंस्पेक्टर सुनगढ़ी अतर सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच गए। मगर धरना दे रहे किसानों ने अफसरों की गाड़ियों के प्रवेश को भी मंडी गेट नहीं खोला। अधिकारियों नें बातचीत कर उनकी समस्या सुनी और समाधान का भरोसा दिलाया। तब जाकर मामला शांत हो सका। एसडीएम ने बताया कि किसानों को बेवजह परेशान न करने के निर्देश क्रय केंद्र प्रभारियों को दिए गए हैं। मानक के अनुरूप खरीद के निर्देश दिए गए हैं।
क्रय केंद्र पर दो कांटों पर होगी तौल, कोई नहीं लौटाया जाएगा
क्रय केंद्रों पर 60 क्विंटल वाले किसान को वरीयता दी गई है। ऐसे में अधिक धान लेकर आए किसानों का विरोध लगातार जारी था। इसका समाधान करते हुए अधिकारियों ने दो कांटों पर नंबर वार तरीके से तौले कराने के निर्देश दिए। कहा कि एक कांटे पर 60 क्विंटल तक वाले किसान और दूसरे पर अधिक लेकर आए किसानों की तौल कराई जाएगी। किसी भी किसान को अधिक या कम धान का नियम बताकर लौटाया नहीं जाएगा।
किसानों ने की सत्यापन कराने की मांग
गुस्साए किसानों ने क्रय केंद्र प्रभारियों की कार्यशैली पर संदेह जताया। उनका कहना था कि क्रय केेंद्रों के प्रभारी साठगांठ करके घर बैठे किसानों का नंबर लगा देते हैं। उनका धान भी मंडी में मौजूद नहीं होता। उनके चक्कर में वह किसान परेशान होता है, जो धान लेकर मंडी में पड़ा है। मांग की गई कि क्रय केंद्रों पर लगाए गए नंबरों के आधार मंडी में लगे धान के ढेर और ट्रॉलियों की गिनती कराकर सत्यापन कराया जाए, हकीकत स्वत: सामने होगी।
क्रय केंद्र पर नंबर लगा..पता किया तो बिक चुका था धान
एसडीएम-तहसीलदार ने मंडी के क्रय केंद्रों पर जाकर निरीक्षण किया और धीमी तौल को लेकर अभिलेख चेक किए। क्रय केंद्र पर तौल के लिए लगाए गए किसान की क्रॉस चेकिंग की गई। क्रय केंद्र प्रभारी ने बताया कि किसान का धान तौल होना है। इस पर लेखपाल से जब किसान को कॉल कराई गई तो उसने पहले ही धान कहीं और बेचने की बात बताई। अधिकारियों ने गंभीरता से काम करने के निर्देश दिए। यह भी कहा कि जिस दिन धान पहुंचे, उसी दिन देखकर कमी बता दी जाए, ताकि किसान को बेवजह इंतजार न करना पड़े।
25 दिन से मंडी में पड़ा धान.. तौल को लेकर किसान परेशान
पीलीभीत। क्रय केंद्रों पर महीन धान की तौल नहीं कराई जा रही है। काफी शिकायतों के बाद भी अब तक कोई रास्ता नहीं निकल सका है। ऐसे में कई किसानों का धान मंडी समिति में पड़ा है। उसे लेकर आगे क्या करना है? किसान परेशान है। अमरिया के निवासी गुरमीत सिंह ने बताया कि 25 दिन पहले वह 100 क्विंटल धान लेकर आए थे। अब तक उसकी तौल नहीं हो सकी है। 25 नंबर टोकन मिला था, अब 135 से आगे की तौल हो रही है। धान मंडी में पड़ा खराब हो रहा। अफसर महीन बताकर निरस्त कर चुके हैं। यह भी आरोप लगाया कि इसी तरह का धान मंडी में खरीदा भी गया है। ऐसे में साठगांठ का आरोप लगाया।
क्रय केंद्र पर अभिलेख चेक करते तहसीलदार विवेक मिश्रा।- फोटो : PILIBHIT