ओलावृष्टि और
बारिश की मार से बेहाल अन्नदाताओं की उम्मीदों पर नीति आयोग की टीम ने भी
पानी फेर दिया। टीम एक-दो जगहों पर कार से उतर प्रशासन की ओर से एकत्र कराए
गए चंद किसानों से कुछ देर मुखातिब हो लौट गई। तमाम ‘खांटी’ किसान दर्द
बयां करने को ब्याकुल रहे, लेकिन उन्हें टीम के अधिकारियों की सूरत तक
देखने को नसीब नहीं हुई।
पूरनपुर। यहां टीम सबसे पहले मनहरिया के
गुरुद्वारा के बाहर एकत्र किसानों को देखकर रुकी। जहां किसान लवप्रीत सिंह,
वीरेंद्र सिंह, अमृत पाल सिंह आदि ने टीम सदस्यों को भारी नुकसान पर मात्र
नौ हजार तक ही मुआवजा मिलने की जानकारी दी। टीम सदस्योें ने किसानों को
बताया कि नियम कानून के अनुसार ही सहायता बांटी जा सकती है।
किसानों ने
समिति से बीज, खाद आदि लेने की क्षति पर बीमा की राशि न मिलने की भी शिकायत
की। किसानोें ने बताया कि समिति के अफसर कह रहे हैं कि जिन लोगों ने
दिसंबर में खाद, बीज लिया है, उनको ही बीमा का लाभ मिलेगा। गांव चंदुइया के
एक स्थान पर कई किसान टीम का इंतजार कर रहे थे। एकत्र किसानों को देखकर
कारों के काफिले की गति धीमी तो हुई, लेकिन चलती कार से ही अधिकारियों ने
यह कह दिया कि देर हो रही है बीसलपुर जाना है, और आगे बढ़ गए।
गाड़ी से उतरे बिना कर लिया निरीक्षण
बीसलपुर।
बृहस्पतिवार को दोपहर बाद पूरनपुर से लौटने के बाद टीम के अधिकारियों ने
गांव दियोरिया, पकड़िया, खरदहाई, मधवापुर, मकरंदापुर, बल्देवपुर, सुजनी,
पंसड़ी, मनकापुर, पिपरिया, वीरसिंहपुर, टेहरी और मानपुर आदि गांवों के
खेतों का कार पर सवार रहकर ही निरीक्षण कर लिया और वापस बरेली चले गए।
खेतों में किसान अधिकारियों की प्रतीक्षा में खड़े रहे। इससे किसान खासा
मायूस भी हुए। चीनी मिल अतिथि गृह में भाजपा विधायक रामसरन वर्मा ने
अधिकारियों को पीड़ितों को कम मुआवजा मिलने व सही सर्वे न होने की शिकायत
की। इस पर अधिकारियों ने उन्हें यथासंभव समाधान का आश्वासन दिया।
टीम के
साथ एडीएम आलोक सिंह, नायब तहसीलदार जिला कृषि अधिकारी डॉ. अवधेश मिश्रा,
जिला कृषि रक्षा अधिकारी रामवीर सिंह और जिला उद्यान अधिकारी समेत तमाम
अधिकारी मौजूद रहे। दोनों तहसीलों में निरीक्षण के दौरान संबंधित एसडीएम और
तहसीलदार भी मौजूद रहे।
टीम में ये रहे शामिल
अधिकारियों
में नीति आयोग के सचिव डॉ. रामानंद, कृषि मंत्रालय के उप सचिव डॉ. पीएस
चक्रवर्ती, गन्ना निदेशालय के सहायक निदेशक डॉ. आशीष मिश्रा और कृषि विभाग
के संयुक्त निदेशक अशोक कुमार शामिल थे।
...जब व्यथा नहीं सुननी थी तो आए क्यों
पूरनपुर।
टीम की जानकारी पर गांव चंदुइया में नीति आयोग की टीम के न रुकने पर एकत्र
किसानों में रोष देखा गया। किसान हरदीप सिंह, रक्षपाल सिंह, कृपाल सिंह,
गुरमीत सिंह, हरभजन सिंह, महावीर सिंह, बलराम आदि ने बताया कि वह नुकसान
फसलों का स्थलीय निरीक्षण टीम को कराना चाहते थे। प्रशासन द्वारा सर्वे के
दौरान बरती जा रही अनियमितता की भी जानकारी देना चाहते थे, लेकिन टीम के
लोगों ने उनकी सुनी ही नहीं। किसानों का कहना था कि अगर टीम के लोगों को
समस्या ही नहीं सुनने का समय था तो आना ही नहीं चाहिए था।