मंडी समिति में वार्ता करते सिटी मजिस्ट्रेट व मौजूद अन्य अधिकारी । स्रोत - आढ़ती
पीलीभीत। प्रशासन सरकारी केंद्रों के गेहूं खरीद लक्ष्य को पूरा करने में जुटा है। इसके लिए व्यापारियों और किसानों पर दबाव भी बनाया जा रहा है। मंडी में अधिक भाव मिलने पर किसान व्यापारियों को ही गेहूं दे रहा है। सोमवार को जब मंडी में गेहूं आया तो व्यापारियों ने नीलामी में भाग नहीं लिया। इस पर किसान हंगामा करने लगे। सूचना पर अधिकारी पहुंचे और वार्ता कर मामले को शांत करवाया। बाद में व्यापारियों से बात कर नीलामी प्रक्रिया शुरू कराई गई।
अधिकारी, मंडी में आने वाले गेहूं को हर हाल में सरकारी केंद्रों पर बिक्री करने पर जोर दे रहे है। वहीं किसानों को अच्छा भाव दिलाने के लिए नीलामी के भी आदेश हैं। इसी क्रम में खरीद की जा रही है। सोमवार को जब किसान अपना गेहूं लेकर मंडी पहुंचे तो वहां पर नीलामी प्रक्रिया नहीं हो पाई।
इस पर किसानों ने व्यापारियों से गेहूं लेने की बात कही। व्यापारियों ने गेहूं केंद्र पर ले जाने कहा और खरीदने से मना कर दिया। इसके बाद किसान उग्र हो गए और हंगामा करने लगे। किसानों का कहना था कि जब वह व्यापारियों से लेनदेन करते हैं तो गेहूं भी उनको देंगे। मंडी में हंगामे की जानकारी पर सिटी मजिस्ट्रेट विजय वर्धन तोमर, डिप्टी आरएमओ वीके शुक्ला भी पहुंच गए।
अधिकारियों ने व्यापारी और किसानों से बात कर मामले को शांत कराया। इसके बाद व्यापारियों के साथ बैठक की गई। बैठक में सभी की समस्याएं सुनीं। तय किया गया कि वे लोग नीलामी में शामिल होंगे। अधिक गेहूं होने पर केंद्र पर बिक्री कराएंगे। इसके बाद मामला शांत हो गया। डिप्टी आरएमओ ने बताया कि व्यापारी नीलामी प्रक्रिया में भाग नहीं ले रहे थे। इसी को लेकर मामला गर्माया था। वार्ता के बाद नीलामी की प्रक्रिया में व्यापारी शामिल हो गए है। अब कोई समस्या नहीं है।