पीलीभीत। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के फायदे के लिए थी। इसमें बीमा कंपनियों को किसानों से न्यूनतम प्रीमियम वसूलकर उनकी फसल का बीमा करना था, ताकि प्राकृतिक आपदा में फसल नष्ट होने पर किसानों को उसकी क्षतिपूर्ति मिल सके। फसल बीमा करने में कंपनियां तो मालामाल हो गईं लेकिन किसानों को उसका खास फायदा नहीं मिला। बीमा कंपनियों ने चार गुना प्रीमियम किसानों से वसूला। प्राकृतिक आपदा में फसल नष्ट होने पर किसानों को क्लेम 25 प्रतिशत ही दिया गया।
केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना भले ही किसानों के लिए है, मगर, उसमें बीमा कंपनियां ही मालामाल हो रही हैं। किसान अब भी वहीं खड़ा है जहां कई साल पहले था। पिछली तीन सीजन में बीमा कंपनी ने 1.15 लाख किसानों से फसल का बीमा कराने के नाम पर 9.67 करोड़ रुपए का प्रीमियम वसूला। उसके बाद जब प्राकृतिक आपदा से किसानों की फसल नष्ट हुई तो किसानों को भुगतान सिर्फ 2.26 करोड़ का ही किया गया। अधिकांश किसानों को तय समय में सर्वे न होने से फसल नुकसान का क्लेम नहीं मिल पाया। केंद्र सरकार ने 13 जनवरी 2016 को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना शुरू की थी। इसमें किसानों को बीमा कराने के लिए खरीफ फसलों पर कुल बीमा राशि का दो फीसदी और रबी की फसल के लिए 1.5 प्रतिशत प्रीमियम का भुगतान करना पड़ता है।
केसीसी में स्वयं हो जाता था फसल बीमा
बैंक से क्रेडिट कार्ड बनवाकर सीजनल ऋण लेने वाले किसानों की फसलों का बीमा अब तक स्वत: ही हो जाता था। किसान बैंक से जितना लोन लेते हैं, उसी के आधार पर इंश्योरेंस कंपनी उनकी फसल का बीमा करती है। सरकार की इस योजना के पीछे उद्देश्य है कि दैवीय आपदा (जैसे- तेज बारिश, बाढ़, ओलावृष्टि, सूखा आदि) से अगर उनकी फसल को नुकसान होता है, तो बीमा कंपनी उस पर नुकसान के आधार पर क्लेम देगी।
किसानों के बजाय कंपनियां ही फायदे में
पिछले साल फसल बीमा की जिम्मेदारी बजाज एलायांज इंश्योरेंस कंपनी को दी गई थी। साल 2018-19 के खरीफ सीजन में 42,287 किसानों ने केसीसी से फसल की बुवाई के लिए पैसा निकाला। बीमा कंपनी ने इतने ही केसीसी खाते से फसल बीमा के नाम पर 4,25,67,563 रुपये प्रीमियम जमा किया किया। रबी सीजन में बीमा कंपनी ने 26261 किसानों से 1,95,76,727 रुपये का प्रीमियम वसूला। यानी एक साल के दो सीजन में 68,548 किसानों से 6,21,44,290 रुपए बीमा कंपनी ने कमाए। इनमें से जब क्लेम देने का नंबर आया तो बीमा कंपनी की शर्तों में मात्र 3623 किसान ही क्लेम में दायरे में आए। इन किसानों को महज 1,22,96,063 रुपये की क्षतिपूर्ति दी गई। यानी बीमा कंपनी को सीधे-सीधे पांच करोड़ रुपये से ज्यादा का मुनाफा हुआ। यही हाल वर्ष 2019-20 में रहा। बीमा कंपनी ने खरीफ सीजन में 46,992 किसानों से दो फीसदी प्रीमियम दर से 3,45,66,063 प्रीमियम तो वसूला। मगर, फसल नुकसान की क्षतिपूर्ति के रूप में मात्र 3167 किसानों को 1,03,12,636 रुपये ही मिले। बीमा कंपनी को 2.42 करोड़ से अधिक का फायदा हुआ। हालांकि वर्तमान रबी सीजन में 26815 किसानों से 1,24,21,695 रुपये प्रीमियम के रुप में वसूले गए, लेकिन अभी तक किसानों को क्षतिपूर्ति नहीं दी गई है। बीमा कंपनी का दावा है कि क्लेम 31 जुलाई तक दिया जाएगा।
90 फीसदी किसानों को प्रीमियम कटने का पता नहीं
फसल बीमा योजना के नाम पर केसीसी के माध्यम से बैंक की ओर से किसान की बिना अनुमति ही प्रीमियम की धनराशि काट ली जाती है। खास बात यह है कि 90 फीसदी किसानों को इसकी जानकारी नहीं होती है कि उनसे बिना पूछे बीमा के प्रीमियम की राशि काट ली गई है।
चंद फसलों का ही होता है बीमा
पीएम फसल बीमा योजना के मुताबिक खरीफ सीजन में मात्र धान और रबी सीजन में गेहूं, मसूर, सरसों/लाही का ही बीमा किया जाता है।
अब बिना पूछे नहीं कटेगा प्रीमियम
कोरोना महामारी के बीच किसानों के लिए राहत भरी खबर है। केंद्र सरकार ने अब फसल बीमा योजना को स्वैच्छिक कर दिया है। अब किसान अपनी मर्जी से फसलों का बीमा करा सकेंगे। उप कृषि निदेशक यशराज सिंह ने बताया कि किसान को खरीफ सीजन में 31 जुलाई से सात पूर्व और रबी सीजन में 31 दिसंबर से सात दिन पूर्व लिखकर सूचित करना होगा कि उन्हें बीमा का प्रीमियम देना है या नहीं।
सरकार अपनी मर्जी से बिना पूछे पैसे काट लेती है, मगर जब हमें पैसों की जरुरत होती है तो सैकड़ों चक्कर लगाने के बाद मिलता है। फसल बीमा योजना से हमें तो आज तक कोई लाभ नहीं मिला।
भुवनेश्वर कुमार, किसान, मरौरीखास
पिछले सीजन में धान की फसल पानी में डूबकर खराब हो गई थी। बीमा कंपनी वाले देखने तक नहीं आए। बीमा कंपनी रुपये तो काट लेती है, मगर, फसल का नुकस,ास्त्रत्त्न नहीं देखती। उन्हें मुनाफा कमाने से मतलब है।
जसवीर सिंह, किसान, देवहा फार्म
दैवीय आपदा में फसलों के नुकसान की क्षतिपूर्ति के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना शुरू की गई थी। जिन किसानों की फसलों को नुकसान हुआ, उन्हें क्षतिपूर्ति दी जा रही है। अब फसल बीमा को स्वैच्छिक कर दिया गया है रिसान की मर्जी से ही फसल बीमा की प्रीमियम राशि कटेगी। - यशराज सिंह, उप कृषि निदेशक