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Pilibhit News: बंदरों से फसल की रखवाली कर रहे किसान को बाघ ने मार डाला, खेत में मिला अधखाया शव

Wed, 12 Nov 2025 11:16 AM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत

सार

पीलीभीत जिले में एक बार फिर बाघ के हमले से जनहानि हुई है। पीलीभीत टाइगर रिजर्व के बराही रेंज की नवदिया बीट से सटे ग्राम पताबोझी निवासी छोटेलाल (45 वर्ष) पुत्र खेमकरन पर बाघ ने हमला कर दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। बुधवार सुबह छोटेलाल का अधखाया शव खेत में मिला। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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पीलीभीत के पूरनपुर कोतवाली क्षेत्र में बंदरों से खेत की रखवाली कर रहे किसान गांव पताबोझी निवासी छोटेलाल (40) को बाघ ने मार डाला। उनका अधखाया शव दूसरे दिन खेत और जंगल किनारे की झाड़ियों में मिला। ग्रामीणों ने घटना का विरोध कर शव करीब पौन घंटे तक नहीं उठने दिया। अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाते हुए कार्रवाई का आश्वासन दिया।

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घटना कोतवाली क्षेत्र में बराही जंगल के किनारे की है। गांव पताबोझी निवासी छोटेलाल (40) का खेत बराही जंगल से सटा हुआ है। खेत में हाल में ही गेहूं बोया गया। बंदरों से खेत की रखवाली करने को छोटेलाल मंगलवार सुबह साइकिल से गए थे। काफी देर तक नहीं लौटने पर परिजन खेत पर पहुंचे। वहां मेड़ के समीप उनकी साइकिल तो खड़ी मिली लेकिन छोटेलाल खेत में नहीं थे। आसपास तलाश कर परिजन लौट गए। 

शाम तक छोटेलाल के घर न पहुंचने पर बुधवार सुबह होते ही कई ग्रामीण उनकी तलाश के लिए खेत पर पहुंचे। सुबह करीब आठ बजे खेत से सटी जंगल की झाड़ी में उनका एक पैर जबकि आगे कुछ दूरी पर उनका अधखाया शव मिला। जानकारी पर गांव और आसपास के लोगों की भीड़ लग गई। पुलिस और वनकर्मी भी मौके पर पहुंचे। छोटेलाल का अधखाया शव झाड़ियों से निकालकर खेत में रखा।
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जंगल किनारे फेंसिंग कराने की मांग 
घटना के विरोध में लोगों ने शव पोस्टमॉर्टम के लिए पुलिस को नहीं उठाने दिया। विरोध कर रहे लोगों का कहना था कि जंगल किनारे के खेतों में किसान रखवाली करने आते हैं। जंगल से निकलकर बाघ ने छोटेलाल का मार डाला। जंगल किनारे तार फेंसिंग कर बाघ को जंगल में ही रोका जाए। 

विरोध की सूचना पर सीओ प्रतीक दहिया, कोतवाल पवन पांडेय, कलीनगर एसडीएम महिपाल सिंह, तहसीलदार मौके पर पहुंचे। विधायक बाबूराम पासवान के पुत्र ने विरोध कर रहे लोगों को सहायता दिलाने का आश्वासन दिया। अधिकारियों ने भी काफी समझाया, तब ग्रामीण शांत हुए। करीब पौन घंटे बाद शव पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया।

चौकी में ताला डालकर खिसक गए वनकर्मी
घटना स्थल से करीब तीन किलोमीटर दूर गांव पताबोझी और आसपास गांव के समीप तक बाघ की चहलकदमी अक्सर होती है। तीन दिनों से घटनास्थल के आसपास बाघ चहलकदमी कर रहा था। घटनास्थल के समीप ही बराही रेंज की वन चौकी हैं। बताते है कि बाघ के हमला करने पर छोटेलाल ने शोर-शराबा भी किया होगा। इसी दौरान वनकर्मी चौकी में ताला डालकर खिसक गए।

खेत में नहीं मिले हमले के कोई निशान : एसडीओ
पीटीआर के एसडीओ रमेश चौहान का कहना है कि घटना के बाद स्वयं टीम के साथ मौके पर पहुंचकर जांच की गई। शव जंगल से करीब 50 से 100 मीटर अंदर बरामद हुआ। खेत में भी बाघ के पगचिह्न या खून आदि के निशान नहीं मिले हैं। स्थिति को स्पष्ट करने के लिए क्षेत्र में छह कैमरे लगा दिए हैं। टीमें निगरानी में जुटी हुई हैं। घटना के बाद ग्रामीणों के आक्रोश को देखते हुए वनकर्मी एहतियात बरतते हैं। चौकी बंद कर भागने का आरोप गलत है।
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मां के बाद पिता का भी सिर से उठ गया साया
छोटेलाल अपने छह भाइयों में पांचवें नंबर पर थे। उनके सभी भाई गांव में ही अलग-अलग घरों में रहते हैं। छोटेलाल के नाम जमीन नहीं थी। उनके माता-पिता के नाम की जमीन पर ही छह भाई खेती करते थे। छोटेलाल की पत्नी की करीब एक दशक पहले मौत हो गई थी। तेरह और दस वर्षीय पुत्रियां और सबसे छोटा पुत्र है। 

मां की मौत के बाद बच्चों का पालन-पोषण छोटेलाल ही कर रहे थे। मां की मौत के बाद पिता का भी साया दोनों बच्चों के सिर से उठ गया। उनकी पुत्री छोटी ने बताया कि पिता मंगलवार को खेत की रखवाली करने की जानकारी देकर सुबह घर से निकले थे। इसके बाद नहीं लौटे। पूरी रात पिता का इंतजार करती रही। बुधवार सुबह बाघ के हमले में पिता की मौत हो जाने की जानकारी मिली।
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