चौकी में ताला डालकर खिसक गए वनकर्मी
घटना स्थल से करीब तीन किलोमीटर दूर गांव पताबोझी और आसपास गांव के समीप तक बाघ की चहलकदमी अक्सर होती है। तीन दिनों से घटनास्थल के आसपास बाघ चहलकदमी कर रहा था। घटनास्थल के समीप ही बराही रेंज की वन चौकी हैं। बताते है कि बाघ के हमला करने पर छोटेलाल ने शोर-शराबा भी किया होगा। इसी दौरान वनकर्मी चौकी में ताला डालकर खिसक गए।
खेत में नहीं मिले हमले के कोई निशान : एसडीओ
पीटीआर के एसडीओ रमेश चौहान का कहना है कि घटना के बाद स्वयं टीम के साथ मौके पर पहुंचकर जांच की गई। शव जंगल से करीब 50 से 100 मीटर अंदर बरामद हुआ। खेत में भी बाघ के पगचिह्न या खून आदि के निशान नहीं मिले हैं। स्थिति को स्पष्ट करने के लिए क्षेत्र में छह कैमरे लगा दिए हैं। टीमें निगरानी में जुटी हुई हैं। घटना के बाद ग्रामीणों के आक्रोश को देखते हुए वनकर्मी एहतियात बरतते हैं। चौकी बंद कर भागने का आरोप गलत है।
मां के बाद पिता का भी सिर से उठ गया साया
छोटेलाल अपने छह भाइयों में पांचवें नंबर पर थे। उनके सभी भाई गांव में ही अलग-अलग घरों में रहते हैं। छोटेलाल के नाम जमीन नहीं थी। उनके माता-पिता के नाम की जमीन पर ही छह भाई खेती करते थे। छोटेलाल की पत्नी की करीब एक दशक पहले मौत हो गई थी। तेरह और दस वर्षीय पुत्रियां और सबसे छोटा पुत्र है।
मां की मौत के बाद बच्चों का पालन-पोषण छोटेलाल ही कर रहे थे। मां की मौत के बाद पिता का भी साया दोनों बच्चों के सिर से उठ गया। उनकी पुत्री छोटी ने बताया कि पिता मंगलवार को खेत की रखवाली करने की जानकारी देकर सुबह घर से निकले थे। इसके बाद नहीं लौटे। पूरी रात पिता का इंतजार करती रही। बुधवार सुबह बाघ के हमले में पिता की मौत हो जाने की जानकारी मिली।