टाइगर रिजर्व के 150 से अधिक दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नवंबर से वेतन नहीं मिल सका। इसके बावजूद यह दैनिक वेतनभोगी अपनी जान जोखिम में डालकर जंगल में गश्त कर रहे हैं। टाइगर रिजर्व में 150 से अधिक दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी तैनात हैं। यह दैनिक वेतनभोगी कर्मी चाहे लकड़ी कटान का मामला हो या फायर सीजन में आग लगने का या फिर बाघ की गतविधियों पर नजर रखना हो, यह सभी कार्य बखूबी निभाते हैं। वहीं वनरक्षकों व वन दरोगा को जरूरी सूचनाएं भी देते हैं। खास बात यह है कि इतनी जिम्मेदारियां निभाने के बावजूद महकमे द्वारा इनको नवंबर से वेतन नहीं दिया गया। ऐसे में दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के परिवार लंबे अरसे से आर्थिक तंगी झेलते आ रहे हैं। करीब एक माह पूर्व दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों का एक शिष्टमंडल जिला मुख्यालय पर डीएफओ कैलाश प्रकाश से मिला था और वेतन दिलाने की मांग की थी। जिस पर डीएफओ ने कैंपा योजना की 40 लाख की धनराशि में से वेतन दिलाने का आश्वासन दिया था। इसे इन वेतनभोगी कर्मियों को दुर्भाग्य ही कहा जाए कि उस मद की धनराशि को दूसरी जगह खर्च कर दिया गया। इधर अब वेतनभोगी कर्मियों ने मुख्यमंत्री सहित वन संरक्षक व डीएफओ को पत्र भेजकर बकाया वेतन का भुगतान कराने की मांग की।