वनकटी क्षेत्र में एक बाघिन अपने बच्चों के साथ कई माह से देखी जा रही है। माना जा रहा है कि पूर्व की तीन घटनाएं उसी के द्वारा अंजाम दी गई थीं। अब यह भी माना जा रहा है कि ताराचंद्र पर इसी बाघिन ने हमला किया है। यदि ऐसा है तो वन विभाग को इस बाघिन की निगरानी करनी होगी ताकि यह और हमले कर नरभक्षी कर क्षेेत्र में कहर न बरपा सके। सोमवार को आग लगने की सूचना पर जंगल गए वाचर ताराचंद को बाघ ने हमला कर मारा डाला। मंगलवार को सुबह उसके अवशेष के रूप में पैर मिले थे। चूंकि एक बाघ या बाघिन अकेले एक मनुष्य के शरीर का मांस एक दिन में नहीं खा सकता ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि बाघ या बाघिन परिवार के साथ हो सकता है। पिछली घटनाओं को देखते हुए इसकी प्रबल संभावनाएं भी दिख रही है। 16 फरवरी को जंगल में लकड़ी बीनने गई 55 वर्षीय कलावती पर बाघिन ने हमला कर इसी बीट में मार डाला था। इसके कुछ दिनों बाद पांच मार्च को जंगल से सटे गांव में सिंचाई करने गए मरौरी निवासी छात्र अनुज को भी इसी बाघिन ने हमला कर मार डाला था। वहीं इन दोनों घटनाओं से पूर्व 24 अक्तूबर 2016 को मरौरी गांव निवासी बेनीराम पर हमला कर मार डाला था। एक ही क्षेत्र में हो रही घटनाओं को देख कर यह माना जा रहा है कि सभी घटनाएं एक ही बाघिन द्वारा अंजाम दी गई हैं यदि ऐसा है तो वन विभाग को इस ओर विशेष निगरानी कर बाघिन को नरभक्षी होने से बचाना होना। यदि जल्द इस पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो माधोटांडा से लेकर शाहजहां तक आतंक मचाने वाले मुस्तफा की तरह इस बाघिन को रोकना मुश्किल हो जाएगा।