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नकली नोट पकड़े जाने का मामलाः आवास विकास में एक घंटे रही दिल्ली पुलिस, मची रही अफरातफरी

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पीलीभीत। नकली नोट बरामद करने आई दिल्ली पुलिस आवास विकास कॉलोनी में एक घंटे तक मौजूद रही। पुलिस ने बुजुर्ग के पूरे मकान को खंगाला। दिल्ली पुलिस की इस कार्यवाही से कॉलोनी में अफरातफरी मची रही। हर कोई आवास विकास कॉलोनी में पकड़े गए नकली नोट पर चर्चा करता दिखाई दिया।
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जहानाबाद के परेवा वैश्य गांव के आढ़ती मोहम्मद अजीम और उसके दोस्त अकील अहमद को नकली नोट के साथ दिल्ली के आनंद बिहार में पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने पकड़े गए आरोपियों के बताए गए स्थानों पर छापेमारी कार्रवाई की। इसके बाद दिल्ली पुलिस लौट गई थी। शुक्रवार को दिल्ली पुलिस ने बरेली के बहेड़ी से अकील दर्जी नाम के युवक को गिरफ्तार किया और उससे पूछताछ के बाद आवास विकास कॉलोनी में उसके मकान पर छापा मारा। दिल्ली पुलिस को अकील दर्जी के मकान से तो कुछ बरामद मिला, लेकिन जब पुलिस ने अकील से कड़ी पूछताछ की तो पड़ोस में वृद्धा के मकान में उसने नकली नोट होना कबूला। तब पुलिस ने वहां से नकली नोट से भरा बोरा और प्रिंटर बरामद किया। दिल्ली पुलिस आवास विकास कॉलोनी में एक घंटे मौजूद रही। तब तक आसपास के घरों में भी अफरातफरी का माहौल रहा।
उत्तराखंड और नेपाल से जुड़े हैं नकली नोटों के तार
पीलीभीत। तराई के इस जनपद में नकली नोट का कारोबार आजमगढ़ से होते हुए उत्तराखंड और नेपाल तक फल फूल रहा है नकली नोट के धंधेबाजों के तार उत्तराखंड और नेपाल से जुड़े हैं। नकली नोट का धंधा उत्तराखंड और नेपाल के रास्ते ही किया जा रहा है। पहले भी एनआईए ने भी छापा मारा था। तब भी नकली नोट बनाने वाले आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था।
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17 अप्रैल 2019 को शहर के मोहल्ला गोपाल सिंह में दंपती के घर से 50,100 और 500 रुपये की नई करेंसी के नकली नोट पकड़े गए थे। उनके घर से प्रिंटर भी बरामद हुआ था। पुलिस ने इस मामले में सात लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। इसके बाद न्यूरिया कॉलोनी में 50 रुपये के नकली नोट बनाने वाले चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने भले ही उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। लेकिन एनआईए के मुताबिक उनके तार बंगाल, नेपाल, और उत्तराखंड से जुड़े पाए गए थे। नकली नोट का कारोबार करने वाले आरोपियों का नेटवर्क तलाशने के लिए एनआईए की टीम ने कई दिनों तक जनपद में डेरा डाला था। मगर, उनके नेटवर्क का पता नहीं लग सका। पुलिस ने सरगना को पकड़ने के साथ ही गिरोह के नेटवर्क को ध्वस्त करने का दावा भी उस समय किया था। मगर, वह दावा हवा हवाई साबित हुआ।
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