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टाइगर रिजर्व बनने के बाद भी चोरी-छिपे कट रहे जंगल

Thu, 04 Jun 2015 11:49 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला पीलीभीत
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नौ जून 2014 को जिले के जंगलों को टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था। इससे पूर्व हर साल की तरह जंगल में कटान के लिए पेड़ों का छपान होता था। इस छपान की आड़ में जिले के जंगल के शाल, सागौन व शीशम के वेशकीमती पेड़ों का अंधाधुंध कटान वन विभाग की मिली भगत से होता था। टाइगर रिजर्व घोषित होने से कुछ माह पहले ही 32 लाट बनाकर करीब 22 हजार पेड़ काटे जाने की अनुमति वनविभाग ने वननिगम को दी थी। इस पर काम भी शुरू हो गया था। टाइगर रिजर्व घोषित होने तक लगभग आठ हजार पेड़ कट भी गए उसके बाद तुरंत रोक लगा दी गई। जंगल में होने वाले इस कटान से विभाग को प्रति वर्ष 18 से 20 करोड़ का राजस्व मिलता था जो अब नहीं मिलेगा लेकिन पेड़ों का कटान बंद होने से पर्यावरण की दृष्टि से जिले को काफी लाभ होगा।
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उजागर हो चुकी वन विभाग की कारस्तानी
टाइगर रिजर्व घोषित होने से पहले वन विभाग के अधिकारी जिले के जंगल से वेशकीमती वनों का स्वयं अवैध कटान कराते थे। एक साल पहले डीएम ओएन सिंह ने शिकायत मिलने पर जब जांच कराई तो वनकर्मियों की संलिप्तता उजागर हुई। उनकी रिपोर्ट पर डीएफओ समेत 24 वनकर्मी सस्पेंड किए गए थे।

चोरी छिपे जारी है कटान
जिले में गत वर्ष ईंट भट्टों की संख्या लगभग 142 थी जो बढ़कर लगभग 150 पहुंच गई है। हैरानी की बात यह है कि जिले के अधिकांश भट्टे जंगल किनारे ही लगे हैं। जिन पर चोरी छिपे ईधन की सप्लाई जंगलों से भी होती है। ऐसे से कुछ मामले पकड़े भी जा चुके हैं।
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आरा मशीनों पर भी लगे लगाम
विभागीय अधिकारियों की मिली भगत से अवैध रूप से काट कर लाई गई लकड़ी आरा मशीनों पर अवैध चीरी जाती हैं। जिले में 68 आरा मशीनों के लाइसेंस हैं जबकि जंगल से सटे क्षेत्रों में कई फार्म हाउस व गांव में भी अवैध आरा मशीनें चल रही हैं। कुछ दिन पूर्व रमनगरा क्षेत्र में जंगल के किनारे अवैध आरामशीन पकड़ी गई थी लेकिन विभागीय मिलीभगत के चलते केवल जांच में केवल गोदाम दर्शाया गया मशीन को गायब कर दिया।

पॉलीथिन बन रही समस्या
तमाम प्रयासों के बाद भी पॉलीथिन के प्रयोग पर रोक नहीं लग पा रही है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ केवल जंगल क्षेत्र में बने सिद्धबाबा स्थल पर ही इसका प्रयोग रोकने की कोशिश कर रहा है जबकि अन्य धार्मिक स्थलों पर इसका प्रयोग धड़ल्ले से हो रहा है। वहीं शहर कस्बों में भी पॉलीथिन पर अंकुश नहीं लगा है।

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में टाइगर रिजर्व बनने से काफी लाभ हुआ है लेकिन जागरूकता की कमी के चलते लोग इसके प्रति संजिदा नहीं हो रहे। हम सभी को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए।
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कैलाश प्रकाश, डीएफओ टाइगर रिजर्व

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