पीलीभीत। मौसम के बदलते मिजाज और कोहरे की आशंका को लेकर आलू, आम, केला समेत सब्जी की फसलों को रोगों से बचाने के लिए उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की ओर से दिशा निर्देश जारी किए गए हैं।
आलू की फसल को अगेती व पिछेती झुलसा रोग से बचाने के लिए साफ/कगुआ (कार्बेंडाजिम 12, मैंकोजेब 63, डब्ल्यूपी) प्रति हेक्टेयर की दर से 800 से 1000 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। माहू कीट के प्रकोप की स्थिति में उसे रोकने के लिए दूसरे छिड़काव में फफूंदीनाशक के साथ कीट नाशक जैसे-इमिडाक्लोप्रिड 17.1, एसएल एक लीटर का 800 से 1000 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर की दर से मिलाकर छिड़काव करें। पिछती झुलसा रोग का प्रकोप होने की स्थिति में रोकथाम के लिए ग्राही (सिस्टेमिक) फफूंद नाशक मेटालेक्जिल युक्त रसायन 2.5 किलोग्राम या साईमोक्जेनिल फफूंदनाशक युक्त रसायन दो किलो ग्राम का 800 से 1000 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव किया जा सकता है।
आम की फसल में गुजिया कीट (मैंगो मिलीबग) से बचाने के लिए माह दिसंबर आम के पेड़ के मुख्य तने पर भूमि से 30-50 सेमी की ऊंचाई पर 400 गेज की पॉलीथीन शीट की 25 सेमी चौड़ी पट्टी को तने के चारों ओर लपेट कर ऊपर व नीचे सुतली से बांधकर उसके दोनों हिस्से पर ग्रीस लगा देना चाहिए। इसके अलावा जनवरी के प्रथम सप्ताह से 15-15 दिन के अंतर से दो बार क्लोरीपाइरीफॉस 1.5 प्रतिशत चूर्ण, चूर्ण 250 ग्राम प्रति पेड़ क हिसाब से तने के चारों ओर छिड़काव करना चाहिए।
केला व अन्य सब्जियों पर तापमान और कोहरा, पाला से होने वाले नुकसान को रोकने के लिए समय-समय पर सिंचाई की जाए। अधिक जानकारी के लिए जिला उद्यान अधिकारी कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है।