पीलीभीत। ललित हरि राजकीय स्नातकोत्तर आयुर्वेद महाविद्यालय में आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला के पहले दिन वनौषधि परिचय व लोक चिकित्सा विषय पर चर्चा की गई। कार्यशाला में देशभर से आए आयुर्वेद संस्थानों के 40 शिक्षकों ने भाग लिया। इस अवसर पर आयुर्वेद चिकित्सा को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।
आयुष विभाग के महानिदेशक नागेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि आयुर्वेद विश्व की सबसे प्राचीन चिकित्सा पद्धति है। इसके सिद्धांत पूरी तरह से वैज्ञानिक हैं। उन्होंने वनौषधियों के परिचय, चिकित्सा में उपयोगिता व शोध को बढ़ावा देने के सुझाव दिए।
मुख्य विकास अधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने आयुर्वेद को भविष्य की चिकित्सा पद्धति बताया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आलोक कुमार ने कहा कि आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति आधुनिक चिकित्सा पद्धति से प्राथमिक व जीर्ण रोगों की चिकित्सा में श्रेष्ठ है।
विश्व आयुर्वेद परिषद के राष्ट्रीय संगठन मंत्री प्रोफेसर योगेश चंद मिश्र ने आयुर्वेद को पूर्ण चिकित्सा बताते हुए शिक्षकों व छात्रों से आयुर्वेद में विश्वास रखने की बात कही।
इस दौरान महानिदेशक ने ललित हरि राजकीय स्नातकोत्तर आयुर्वेद महाविद्यालय व चिकित्सालय के छात्रावास, एकेडमिक ब्लॉक, फार्मेसी, आयुर्वेदिक व होम्योपैथिक डिस्पेंसरी का निरीक्षण किया।
बताया गया कि शोध छात्रों व शिक्षकों का दल शुक्रवार को दुधवा राष्ट्रीय उद्यान, शनिवार को पीलीभीत टाइगर रिजर्व का भ्रमण करेगा। इस मौके पर जयपुर से मोहन लाल जायसवाल, दिल्ली से प्रो. मीना, भोपाल से अनिल शुक्ला, डॉ. हरिशंकर मिश्रा, राकेश तिवारी आदि मौजूद रहे।