माधोटांडा/पीलीभीत। नेपाल से आए जंगली हाथियों को लेकर टाइगर रिजर्व प्रशासन गंभीर नहीं हुआ तो एक बार फिर हाथियों का झुंड शारदा नदी के इस पार आकर उत्पात मचा सकता है। वजह यह है कि ढकिया ताल्लुके महाराजपुर में रात को उत्पात मचाने के बाद हाथी शारदा नदी के नजदीक जाकर आराम फरमाते हैं। इससे पहले सतर्कता में चूक के चलते दो नेपाली हाथियों ने पीलीभीत समेत बरेली, रामपुर की सीमा तक जमकर उत्पात मचाया था और एक वन रक्षक समेत कई लोगों की जान ले ली थी।
नेपाल की शुक्लाफांटा सेंचुरी की ओर से पिछले दिनों आए दो हाथी शारदा नदी के पार बराही रेंज के लग्गा भग्गा क्षेत्र में आ धमके थे। हाथियों की दस्तक के बाद भी टाइगर रिजर्व प्रशासन अंजान बना रहा, निगरानी न होने के चलते दोनों हाथी शारदा नदी के इस पार टाइगर रिजर्व के जंगल में आ गए थे। इसके बाद बरेली और रामपुर की सीमा में दो माह तक जमकर उत्पात मचाया था। काफी मशक्कत के बाद हाथियों को बमुश्किल नेपाल की ओर खदेड़ा जा सका था। इधर, एक बार फिर लग्गा भग्गा क्षेत्र में हाथियों ने दस्तक दी है। पहले एक हाथी आया था। अब इनकी संख्या बढ़कर पांच हो गई है। ये हाथी ढकिया ताल्लुके महाराजपुर और गोरख डिब्बी क्षेत्र में किसानों की फसलें उजाड़ रहे हैं। हाथियों का उत्पात रोकने के लिए ग्रामीणों के पास आग जलाने और शोर मचाने के अलावा और साधन नहीं है। इसके चलते नुकसान का दायरा भी लगातार बढ़ता जा रहा है।
लग्गा भग्गा जंगल से आधी रात के बाद बाहर निकल रहे हाथी कई घंटों तक किसानों की फसलों को रौंदते हैं। इसके बाद करीब एक घंटे तक शारदा नदी के किनारे आकर आराम भी करते हैं। हाथियों की आमद के बाद भले ही टाइगर रिजर्व के अफसर तमाम दावे कर रहे हों, लेकिन यह सब मात्र कागजों तक सीमित है। निगरानी के नाम पर मात्र दो वॉचर सुबह हाथियों के पगचिह्न ट्रेस करने में लगे रहते हैं।
वन विभाग जाग जाता तो हाथियों की संख्या नहीं बढ़ती
एक हाथी की दस्तक के बाद अगर विभाग की ओर से कोई प्रयास किए जाते तो शायद हाथियों की संख्या नहीं बढ़ती, रात को फसलों को रौंदने के बाद हाथी नदी किनारे जाकर बैठ रहे है। फसलों के नुकसान का दायरा लगातार बढ़ रहा है।
- रामदास राना
हाथियों की आमद नहीं रुकी है। धान की फसल जैसे-जैसे पक रही है वैसे हाथियों की संख्या बढ़ रही है। हाथी रात को गांव की सीमा में आकर फसलें रौंद रहे हैं। ग्रामीण एकत्र होकर खदेड़ने के प्रयास तो कर रहे, लेकिन कोई सफलता नहीं मिल रही।
- भगीरथी
निगरानी के लिए वनकर्मियों की संख्या बढ़ा दी गई है। ग्रामीणों को पटाखें भी उपलब्ध कराए गए है। वनकर्मी लगातार हाथियों की लोकेशन ट्रेस कर रहे हैं।
-वजीर हसन, रेंजर, बराही