पीलीभीत। तराई के जंगलों से निकलकर खेतों और आबादी तक पहुंच रहे जंगली हाथियों की बढ़ती आवाजाही पर अंकुश लगाने के लिए उत्तर प्रदेश में पहली बार स्टेट एलिफेंट एक्शन प्लान तैयार किया जा रहा है। मानव-हाथी संघर्ष की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए वन विभाग ने 10 वर्ष की रणनीति पर आधारित इस योजना की तैयारियां शुरू कर दी हैं। जनवरी तक इसका ड्राफ्ट तैयार कर पीलीभीत, लखीमपुर, बहराइच, सहारनपुर और बिजनौर में लागू करने का लक्ष्य रखा गया है।
प्रदेश स्तर पर 23 जून को हुई उच्चस्तरीय बैठक में मानव-हाथी संघर्ष को लेकर विस्तृत मंथन के बाद इस योजना को मंजूरी दी गई। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, देश के अन्य राज्यों में लागू सफल मॉडलों का अध्ययन कर उत्तर प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप कार्ययोजना तैयार की जा रही है। नेपाल सीमा से लगे क्षेत्रों में भविष्य में हाथियों की आवाजाही बढ़ने की आशंका को देखते हुए विभाग ने समय रहते तैयारी शुरू कर दी है। योजना को चार चरणों में तैयार किया जाएगा।
पहले चरण में हाथियों के पारंपरिक कॉरिडोर, उनकी संख्या, विचरण क्षेत्र और ठहराव का बेसलाइन डेटा एकत्र किया जाएगा। दूसरे चरण में सिंचाई, लोक निर्माण, कृषि, विद्युत समेत संबंधित विभागों व स्थानीय ग्रामीणों की राय शामिल की जाएगी। तीसरे चरण में वन विभाग की मौजूदा वन्यजीव संरक्षण योजनाओं को इस 10 वर्षीय कार्ययोजना से जोड़ा जाएगा। चौथे चरण में वन मंत्रालय के साथ अन्य विभागों के समन्वय से वित्तीय संसाधन जुटाने की रूपरेखा तैयार होगी।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व से सटी नेपाल की शुक्लाफांटा और लखीमपुर की किशनपुर सेंचुरी के बीच का जंगल दशकों से हाथियों का प्राकृतिक कॉरिडोर रहा है। पहले दोनों देशों के वन विभाग के समन्वय से हाथियों को सुरक्षित वापस भेज दिया जाता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में हालात बदल गए हैं। अब हाथियों के झुंड खेतों और गांवों तक पहुंच रहे हैं, इससे फसलों को भारी नुकसान और जनहानि की घटनाएं बढ़ी हैं। वन विभाग के अनुसार, वर्ष 2024 में हाथियों से फसल नुकसान के एवज में करीब 37 लाख रुपये का मुआवजा देना पड़ा।
वहीं, वर्ष 2025 में कलीनगर तहसील के ढकिया ताल्लुके महाराजपुर गांव में 20 से अधिक हाथियों के झुंड ने एक बुजुर्ग ग्रामीण की जान ले ली थी। इसके अलावा बराही रेंज से सटे गांव में दो अन्य ग्रामीणों की हाथियों के हमले में मौत हो चुकी है। डीएफओ मनीष सिंह ने बताया कि प्रदेश में हाथियों की बढ़ती समस्या के स्थायी समाधान के लिए स्टेट एलिफेंट एक्शन प्लान तैयार किया जा रहा है। पहले चरण में हाथियों के मूवमेंट, संख्या और कॉरिडोर का बेसलाइन डेटा जुटाया जा रहा है।