फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Pilibhit News: पीटीआर में बनेगा एलिफेंट काॅरिडोर, बजट में मिले 48.94 करोड़

Tue, 06 Feb 2024 02:13 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
विज्ञापन
तराई क्षेत्र में विचरण करते नेपाली हाथी। फाइल फोटो
विज्ञापन
पीलीभीत। एलिफेंट कारिडोर (हाथी गलियारा) को अमलीजामा पहनाने के लिए सरकार ने बजट में अलग से इंतजाम किया है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के 350 करोड़ रुपये के बजट में से 48.94 करोड़ रुपये हाथी गलियारे के लिए देने की स्वीकृति दी गई है। पीलीभीत में पिछले वर्ष ही हाथी काॅरिडोर बनाने की घोषणा की गई थी। इससे नेपाल से आने वाले हाथियों के उत्पात से ग्रामीणों को छुटकारा मिल सकेगा। पीलीभीत के अलावा लखीमपुर, शाहजहांपुर व बहराइच जनपद के जंगली इलाके को जोड़कर काॅरिडोर बनाना प्रस्तावित है।
विज्ञापन



पीटीआर की बराही रेंज की सीमा नेपाल की शुक्लाफांटा सेंचुरी से मिली हुई है। इसके चलते पीलीभीत का जंगल बाघ समेत अन्य वन्यजीवों के अलावा हाथियों के लिए भी मुफीद रहा है। बराही रेंज के लग्गा-भग्गा से लेकर दुधवा टाइगर रिजर्व तक का जंगल से नेपाल के हाथियों का आना-जाना रहता है। तमाम कोशिशों के बाद भी नेेपाल की ओर से हाथियों के आने का सिलसिला बंद नहीं हुआ।
पिछले कुछ वर्षों से स्थिति बिगड़ने लगी है। अभी तक हाथी महज फसल उजाड़ते थे, लेकिन अब इन हाथियों ने रास्ते में आने वाले इंसानों को भी मारना शुरू कर दिया। पिछले साल ही नेपाल की ओर से आए हाथियों ने सैकड़ों बीघा फसल उजाड़ दी थी और दो लोगों को मार दिया था। 22 अक्तूबर, 2022 को तराई एलिफेंट काॅरिडोर को मंजूरी मिली थी।
विज्ञापन

इसमें दुधवा टाइगर रिजर्व, शाहजहांपुर वन प्रभाग का बफर जोन, कतर्नियाघाट, पीलीभीत टाइगर रिजर्व का 307235.80 हेक्टेयर क्षेत्र शामिल है। पीटीआर का 73024.98 हेक्टेयर दायरा शामिल हैं। सोमवार को प्रदेश सरकार ने बजट में एनटीसीए को दिए बजट में से 48.94 करोड़ रुपये हाथी गलियारे के लिए प्रस्तावित किए हैं। इससे उम्मीद लगाई जा रही है कि अब हाथियों को प्राकृतिक वास स्थल देने के लिए कॉरिडोर जल्द ही विकसित किया जाएगा।







पीटीआर के सुधर सकते हैं संसाधन



एनटीसीए के 350 करोड़ रुपये के बजट से पीटीआर को भी लाभ मिल मिलेगा। पीलीभीत टाइगर रिजर्व के जंगल में जाल फेंसिंग की उम्मीद बढ़ गई है। इससे हिंसक पशु बाघ, तेंदुए आदि जंगल से बाहर नहीं निकल सकेंगे। इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं रुक सकेंगी। बता दें कि वर्ष 2014 में पीटीआर बनने के बाद से अब तक 35 से ज्यादा लोग बाघ का शिकार हो चुके हैं।





फोटो- 31
इस बार एनटीसीए को भारी भरकम बजट दिया गया है। इससे उम्मीद है कि पीलीभीत के जंगल की सीमा पर जाल फेंसिंग हो जाएगी। इसके साथ ही बाघों के संरक्षण पर भी बेहतर कार्य हो सकेंगे। - अतुल सिंह, बाघ मित्र

फोटो-32
पिछली बार सरकार ने एनटीसीए को 100 करोड़ रुपये दिए थे इस बार 350 करोड़ रुपये दिए हैं। इससे प्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व में बेहतर कार्य किए जाएंगे। पीलीभीत के जंगल के हालात भी सुधरेंगे। - बिलाल खान, वन्यजीव प्रेमी

तराई क्षेत्र में विचरण करते नेपाली हाथी। फाइल फोटो

तराई क्षेत्र में विचरण करते नेपाली हाथी। फाइल फोटो

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें