आखिरकार जिसकी आशंका जताई जा रही थी, वही हो गया। नेपाली हाथियों का झुंड बीती रात में शारदा नदी के इस पार आ पहुंचा। हाथियों ने गभिया सहराई तथा नलडेंगा इलाके में जमकर उत्पात मचाया। गनीमत रही कि ग्रामीणों की सतर्कता के चलते हाथी गांव में नहीं घुस सके, मगर उन्होंने धान, गन्ना और केले की फसलों को बुरी तरह रौंद डाला। वन विभाग का दावा है कि शुक्रवार सुबह हाथियों के झुंड को दोबारा आने पर शारदा नदी के पार तक खदेड़ दिया गया है।
नेपाल की शुक्ला फांटा सेंक्चुरी से करीब 20 दिन पहले तीन हाथी टाइगर रिजर्व के लग्गाभग्गा इलाके में आ गए थे। शुरुआती दिनों में हाथियों ने फसलों का नुकसान नहीं किया, मगर दो दिन बीतने के बाद नेपाली हाथियों ने ढकिया ताल्लुके महाराजपुर, थारुबस्ती और गोरखडिब्बी में जमकर उत्पात मचाया। हाथियों ने 10 से अधिक किसानों की झोंपड़ियों को तहस नहस कर डाला। साथ ही उनकी धान की फसलों को रौंद डाला था। ग्रामीणों ने टाइगर रिजर्व प्रशासन ने हाथियों से निजात दिलाने की गुहार भी लगाई, मगर टाइगर रिजर्व प्रशासन मात्र हाथियों की निगरानी की बात कहकर पल्ला झाड़ता रहा।
अमर उजाला ने प्रमुखता से समाचार प्रकाशित करते हुए हाथियों के शारदा नदी के इस पार आने की आशंका भी जताई थी। आखिरकार वही हो भी गया। नेपाली हाथियों का झुंड रात करीब दो बजे मार्जनल बांध के रास्ते शारदा नदी पार कर गभिया सहराई और नलडेंगा इलाके में आ पहुंचा। हाथियों की चिंघाड़ सुन ग्रामीणों की नींद खुली तो पूरे गांव में हड़कंप मच गया।
हाथियों को झुंड कहीं गांव में अंदर तक न आ जाए, इसको लेकर ग्रामीण शोर-शराबा करने लगे और आग जलाकर हाथियों मेें भगाने में जुटे रहे। इससे हाथी गांव में तो नहीं घुस सके, मगर, उन्होंने अंजन ढाली, पवित्रदास, मनोरंजन साना, विश्वजीत दास, तरुणी मंडल, अतुल चंद्र ढाली, सुभाष सिकदार, जयदेव, नकुल आदि किसानों की गन्ना, धान और केले की फसलों को रौंद डाला। गांव वालों का कहना है कि तड़के करीब चार बजे हाथियों का झुंड शारदा नदी के किनारे चला गया। ग्रामीणों के मुताबिक तीन हाथी थे। इधर, वन विभाग का दावा है कि हाथियों को ग्रामीणों की मदद से शारदा नदी के पार खदेड़ दिया गया है।
शारदा नदी के इस पार एक हाथी आने की जानकारी मिली थी। इस मामले से उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। वनकर्मियों से दो शिफ्टों में निगरानी कराई जा रही है। ग्रामीणों से भी सतर्क रहने को कहा गया है।
- डीके गोयल, वन क्षेत्राधिकारी, बराही