पीलीभीत। विज्ञान में सूर्य या चंद्रग्रहण को खगोलीय घटना माना जाता है, मगर ज्योतिष में इसके तमाम मायने गिनाए जाते हैं। ज्योतिष के अनुसार पांच जून से पांच जुलाई के बीच तीन ग्रहण पड़ रहे हैं। ऐसा संयोग सैकड़ों वर्षों के बाद बन रहा है। पांच जून और पांच जुलाई को चंद्रग्रहण लगेगा। वहीं 21 जून को सूर्य ग्रहण। ज्योतिष के जानकारों का कहना है कि 26 दिसंबर 2019 को हुए पूर्ण सूर्य ग्रहण के बाद में दूसरा सूर्य ग्रहण है। दिसंबर में प्रारंभ हुई कोरोना महामारी इस ग्रहण के बाद शिथिल होकर निष्प्रभावी होने लगेगी।
पांच जून को लगेगा उपछायी चंद्रग्रहण
ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक पांच जून को उपछायी चंद्रग्रहण और पांच जुलाई को दोबारा उपछाया चंद्र ग्रहण पड़ेगा। दोनों तिथियों में चंद्रमा पृथ्वी की बिरल (अंश) छाया से गुजरेगा। ज्योतिष शास्त्र में उपछाया को ग्रहण की मान्यता नहीं है। इसलिए किसी तरह का ग्रहण सूतक मान्य नहीं है। इस दशा में जन सामान्य भी भय ना पालें। 21 जून को आषाढ़ कृष्ण अमावस्या रविवार को सुबह 9.16 बजे से 3.04 बजे तक सूर्य ग्रहण होगा। भारतीय क्षेत्र में यह ग्रहण 10 बजे से 2.30 बजे तक की समयावधि में देखा जा सकेगा। इसे नंगी आंखों से देखना स्वास्थ्य के लिहाज से ठीक नहीं है। ग्रहण का सूतक 20 जून शनिवार को रात्रि 10 बजे से प्रारंभ होगा। यह ग्रहण मृगशिरा नक्षत्र और मिथुन राशि पर पड़ने जा रहा है।
मिथुन, कर्क, वृश्चिक और कुंभ राशि के लिए विपरीत फलदायक
21 जून को पड़ने वाला सूर्य ग्रहण मेष, सिंह, कन्या, मकर, मीन राशि के जातकों के लिए श्रेष्ठ फलदायक होगा। वृष, तुला, धनु राशि वालों को मध्यम फलदायक और मिथुन, कर्क, वृश्चिक और कुंभ राशि वालों के लिए विपरीत फलदायक होगा।
सूर्यग्रहण के बाद निष्प्रभावी हो सकती है कोरोना महामारी
पांच जून और पांच जुलाई को उपछायी चंद्रग्रहण है। ज्योतिष शास्त्र में उपछाया को ग्रहण की मान्यता नहीं दी गई। 21 जून को सूर्य ग्रहण लगेगा। 26 दिसंबर 2019 को हुए पूर्ण सूर्य ग्रहण के बाद में दूसरा सूर्य ग्रहण है। दिसंबर में प्रारंभ हुई कोरोना महामारी इस ग्रहण के बाद शिथिल होकर निष्प्रभावी होने लगेगी। - अभिषेक आचार्य, ज्योतिषाचार्य