पीलीभीत। प्रदेश सरकार के निर्देश पर मदरसों का सर्वे कराया जाएगा। देखा जाएगा कि कितने बिना मान्यता के संचालित हैं। यहां बता दें कि पिछले कुछ वर्षों में नेपाल से सटे इलाके में मदरसों की संख्या बढ़ी है।
जिले में मान्यता प्राप्त 220 मदरसे हैं। इनमें अनुदानित मदरसा एक भी नहीं है। पिछले दिनों दावत-ए-इस्लामी द्वारा संचालित मदरसों को लेकर हंगामा हुआ था। जिसके बाद शहर में संचालित एक मदरसा बंद भी कराया गया था। दावत-ए-इस्लामी के जिले में अब भी छह मदरसे हैं।
यहां बता दें कि अभी विभाग के पास ये जानकारी नहीं है कि जिले में बगैर मान्यता के कितने मदरसे चल रहे हैं। शासन के निर्देश के बाद इनका डाटा एकत्र किया जाएगा। दरअसल प्रदेश सरकार जानना चाहती है कि मदरसे कौन सी संस्था संचालित कर रही है। मदरसा निजी भवन में चल रहा है या फिर किराये के भवन में। इसके अलावा मदरसों में पढ़ रहे छात्र-छात्राओं की संख्या, पेयजल, फर्नीचर, विद्युत आपूर्ति, शौचालय की व्यवस्था, शिक्षकों की संख्या, मदरसे में लागू पाठ्यक्रम, आय का स्रोत और किसी गैर सरकारी संस्था से मदरसे की संबद्धता से संबंधित सूचनाएं भी इकट्ठा की जाएंगी।
सूत्रों का कहना है कि शारदा पार नेपाल की सीमा से सटे इलाके में मदरसों की संख्या पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है। यही वजह है कि सीमावर्ती इलाका होने के कारण यहां गहनता से जांच होगी।
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जिले में मान्यता प्राप्त 220 मदरसे हैं। सर्वे के निर्देश मिले हैं। टीमें लगाकर सर्वे कराया जाएगा।
- केपी सिंह, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी