आलिमा तरन्नुम फातिमा ने कहा कि इस्लाम ने औरतों के अधिकारों की रक्षा के लिए उन्हें अपने माता-पिता की विरासत में बराबर का हक दिया है, ताकि वह भी अन्य लोगों की तरह आर्थिक स्वतंत्रता और सम्मान प्राप्त कर सकें।
वह रविवार को दरगाह शाहजी मियां से संबद्ध फैजाने शेरिया महिला अरेबिक कॉलेज के वार्षिक कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि इस्लाम के उदय से पूर्व पूरी दुनिया में महिलाओं की सामाजिक स्थिति काफी दयनीय थी। पुत्रियों को जन्म के समय ही जमीन में दफना दिया जाता था। उन्होंने महिलाओं से नमाज, रोजा, हज, जमात का पालन करने की अपील की और अनावश्यक खर्चों से बचने का आह्वान किया।
इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ कुरान की तिलावत से हुआ। छात्रा अनम, शैबी, नाजिश, सना आदि ने नात और मनकबत पेश की। इसके अलावा आलिमा आलिया नूरी, महनाज बी, तौसीफ जहां सना नूरी हुमा बी ने भी महिलाओं से इस्लामिक जीवन गुजारने का आह्वान किया। समापन पर समाज की तरक्की की दुआएं मांगी गईं।
कॉलेज के संचालक मौलाना अरशद मियां शेरी ने बताया कि छह अप्रैल को भारतीय कांफ्रेंस होगी। इसमें दूरदराज के इस्लामी विद्वान शिरकत करेंगे।