हरदोई ब्रांच नहर की दोनों पटरियों को मजबूत करने के नाम पर मिट्टी की जगह रेत से डौले बनवा दिए गए। यह कार्य अधिशासी अभियंता ने अपने चहेते ठेकेदार को दिलाया था। अब इसका भुगतान कराने को पापड़ बेलने पड़ रहे हैं। सहायक अभियंता द्वारा कार्य दुरुस्त न होने तक बिल न बनाने की हिदायत पर दोबारा डौलों को दुरुस्त किया जा रहा है। बाइफरकेशन से निकलने वाली हरदोई ब्रांच नहर में पहले दस करोड़ की लागत से सिल्ट सफाई कराने के नाम पर बड़ा खेल खेला गया। सिल्ट सफाई के नाम पर खानापूर्ति करने के बाद नहर के दोनों ओर डौले बनाने का कार्य किया गया। बताते हैं कि लाखों की लागत से होने वाला यह कार्य अधिशासी अभियंता ने अपने चहेते ठेकेदार को दिया था। ठेकेदार ने मौके का फायदा उठाकर डौलों को मिट्टी की जगह रेत से बना दिया। इस पर स्थानीय अभियंताओं ने एतराज जताया तो ठेकेदार के प्रतिनिधि द्वारा सर्विस मार्ग के किनारे नहर की पटरी से मिट्टी उठवाकर जहां-तहां डौलों पर डलवा दी गई। मिट्टी उठान के दौरान हुए गड्ढों को रेत से भर दिया गया। इस बीच स्थानीय अभियंताओं ने नाराजगी जताई गई तो उन्हें ठेकेदार को मंत्री का आदमी कहकर चुप करा दिया गया। इधर, बिलों के भुगतान का नंबर आया तो सहायक अभियंता ने कार्य सही ढंग से न होने तक बिल बनाने से साफ इंकार कर दिया गया। इस पर अधिशासी अभियंता ने आला अफसरों से जुगाड़ कर मुजफ्फरनगर में तैनात सहायक अभियंता जयपाल सिंह को बाइफरकेशन में अतिरिक्त चार्ज का आदेश करा लिया। मगर जयपाल सिंह आने पर सहायक अभियंता बलवीर सिंह ने चार्ज देने से मना कर दिया। इस मामले को लेकर काफी तनातनी हुई थी। इसके बाद अधिशासी अभियंता ने दुबारा सहायक अभियंता बलवीर सिंह ने गड़बड़ी वाले स्थानों पर मरम्मत कराने की बात कही। डौलों रि मरम्मत के नाम पर खानापूर्ति का खेल शुरू कर दिया गया है। रेत से बने डौले अखिरकार कब तक साथ देंगे, यह मामला सिंचाई विभाग में खासी चर्चा का विषय बना हुआ है।