जिले का पहला बैगलेस स्कूल हुआ सरकारी स्कूल बरहा
जल्द ही सीसी कैमरे की जद में होंगे स्कूली बच्चे
शहर से सटे उच्च प्राथमिक विद्यालय बरहा जिले का पहला बैगलेस स्कूल बन चुका है। करीब 216 बच्चों के इस स्कूल में अब बच्चों को भारी भरकम बैग की जगह मात्र एक डायरी व रफ कॉपी ही लानी होती है। इस स्कूल में राज्यपाल पुरस्कार प्राप्त प्रधानाध्यापक गंगाराम, शिक्षिका शाहजहां बेगम, ममता गंगवार, मीना, रोबीना, संतोष खरे, विजेता, विजयलक्ष्मी, किरन, सृष्टि तैनात हैं। इन शिक्षक शिक्षिकाओं की कार्य करने के प्रति दृढ़ इच्छा शक्ति से ही यह स्कूल शैक्षिक गुणवत्ता के मामले में अन्य स्कूलों से कहीं आगे है।
इस तकनीक से स्कूल हुआ बैगलेस
स्कूल को बैगलेस करने में महती भूमिका निभाने वाले शिक्षक संतोष खरे बताते हैं कि शैक्षिक सत्र के शुरुआत में बच्चों को पुरानी किताबें दी गई थीं। इसके बाद नई किताबों का भी वितरण कर दिया गया। बच्चे पुरानी किताबों को कहीं रद्दी समझकर न बेच दें, इसको लेकर स्कूल को बैगलेस करने का प्लान बनाया गया। बच्चों से पुरानी किताबों के पूरे सेट को घर पर रखने व नई किताबों व कॉपियों को स्कूल में छोड़कर जाने को कहा गया। बच्चों से सिर्फ एक डायरी व एक रफ कॉपी लाने को कहा गया। यह प्रक्रिया कुछ दिन बाद कारगर साबित हुई। अब बच्चों को भारी भरकम स्कूल बैग नहंी उठाने पड़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि बैगलेस होने से शैक्षिक गुणवत्ता बेहतर हुई है। पहले बच्चे जिन विषयों को स्कूल में पढ़ते हैं, उन्हीं को वह पुरानी किताबों के माध्यम से घर में रफ कॉपियों पर लिखकर रिवीजन करते हैं। ऐसे में उन्हें प्रश्नों को याद करने में खासी आसानी होती है।
जल्द ही सीसी कैमरे की जद में होगा स्कूल
यदि सबकुछ ठीकठाक रहा तो बरहा का उच्च प्राथमिक विद्यालय जिले का पहला ऐसा सरकारी स्कूल होगा जो सीसी कैमरे से लैस होगा। प्रधानाध्यापक गंगाराम ने बताया कि शैक्षिक गुणवत्ता बेहतर बनाने को पूरा स्टाफ निरंतर प्रयास कर रहा है। अब विद्यालय परिसर में सीसी कैमरे लगाए जाएंगे। कक्षाओं के अलावा रसोई घर में भी सीसी कैमरे लगाने की योजना है। इससे स्कूल में शिक्षण कार्य समेत अन्य सभी व्यवस्थाओं में काफी सुधार होगा।
कुछ नया करने की चाहत ने दिया हौसला
कॉन्वेंट स्कूलों के बच्चों को देखकर अकसर मन में ख्याल आता था कि हम अपने स्कूलों को भी इतना बेहतर क्यों नहीं कर सकते। कुछ नया करने की चाहत ने हौंसला बढ़ाया। स्टाफ के सहयोग से आज स्कूल बैगलेस हो चुका है। शैक्षिक गुणवत्ता को और अधिक बेहतर बनाने के प्रयास चल रहे हैं।
संतोष खरे, शिक्षक
मन में यदि दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो कुछ भी असंभव नहीं है। अधिकारियों व शिक्षक शिक्षिकाओं के सहयोग से आज यह विद्यालय जिले में अपनी अलग पहचान बना चुका है। यहां के बच्चे भी अब कॉन्वेंट स्कूल के बच्चों की तरह खुद को पाते हुए काफी खुशी महसूस करते हैं।
गंगाराम, राज्यपाल पुरस्कार प्राप्त प्रधानाध्यापक