पांच दशक पूर्व कस्बावासियों ने बच्चों के सुनहरे भविष्य का सपना देख उसे सच साबित करने के लिए 27 एकड़ जमीन दान में दे डाली थी। इस जमीन पर शैक्षिक संस्थाओं के स्थापना की जिम्मेदारी जागरूक लोगों पर छोड़ी थी, लेकिन इतनी भूमि होने के बावजूद यहां एक अदद स्कूल नहीं खोला जा सका है।
तराई क्षेत्र का यह कृषि प्रधान इलाका शैक्षिक संसाधनों के अभाव के दौर से गुजर रहा है। कस्बे से करीब 12 किमी दूर पूरनपुर में सबसे नजदीकी शिक्षण संस्थाएं हैं। कहने को तो केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी और उनके पुत्र वरुण गांधी यहां प्रत्येक चुनाव के दौरान इंटर कॉलेज बनवाने की घोषणा करते आए हैं, लेकिन उनको अमलीजामा अभी तक नहीं पहनाया जा सका है। यहां चुनावों के दौरान प्रत्याशियों और पार्टी के नुमाइंदे जनता की नब्ज टटोलकर हाईस्कूल और इंटर कॉलेज की घोषणा करते गए, लेकिन बाद में किसी ने भी इस ओर मुड़कर नहीं देखा। यही वजह रही कि आज तक एक राजकीय इंटर कॉलेज भी नहीं बन सका।
आश्रम पद्धति विद्यालय से नहीं मिल सकेगी राहत
विधायक पीतमराम के प्रयासों से एक राजकीय आश्रम पद्धति स्कूल स्वीकृत हुआ, जिसमें बेशकीमती जमीन स्कूल निर्माण के लिए दे दी गई, लेकिन कस्बावासियों के बच्चों को इस विद्यालय में बहुत अधिक राहत नहीं मिल सकेगी। वजह यहां दाखिला मेरिट के अनुसार ही किया जाएगा।
वर्ष 1966 में दी थी 27 एकड़ जमीन
वर्ष 1966 में चकबंदी के दौरान स्थानीय लोगों ने बच्चों को शिक्षित बनाने का सपना पूरा करने के लिए अपनी निजी कृषि भूमि से जनता जूनियर हाईस्कूल, कृषि इंटर कॉलेज के नाम से अलग-अलग प्लाटों में विभाजित कर सुरक्षित कराई थी। इसमें 12.39 एकड़ का प्लाट मौजा परसरामपुर में, जनता हाईस्कूल के नाम 11 एकड़ जमीन बसंतपुर नौनेर व जूनियर हाईस्कूल के लिए छह एकड़ जमीन दी थी। दो बीघा भूमि गांव निवासी उत्तम ने भी दान में दी थी। जिस पर विशाल भवन बना है, लेकिन वर्तमान में इस भवन में परिषदीय जूनियर हाईस्कूल चल रहा है।
आय का भी हो रहा है बंदरबांट
जूनियर हाईस्कूल के नाम की भूमि प्रधानाध्यापक नीलाम करते हैं। वहीं 12.39 एकड़ भूमि जिसकी नीलामी तो वर्षों से की जाती थी, लेकिन आमदनी का बंदरबांट होता रहता था। थाने के पीछे पड़ी छह एकड़ भूमि की आमदनी को प्रधान गांव के विकास के नाम पर खर्च होना दर्शा देते थे।
पूर्व प्रधान में समिति बनाकर आमदनी रखी सुरक्षित
कस्बे के मौजा परसरामपुर में 12.39 एकड़ भूमि जो जनता हाईस्कूल कृषि फार्म के लिए सुरक्षित थी। उसकी आय जब खुर्दबुर्द होने लगी तो वर्ष 2008 में प्रधान रामऔतार ने जनता हाईस्कूल का गठन कर रजिस्ट्रेशन कराया। उस समय साढ़े छह लाख रुपये की रकम को तीनों के संयुक्त खाते में जमा किया गया। पूर्व प्रधान रामऔतार का कहना है कि खाते में जो रकम पड़ी है, उससे डीएम से संस्तुति लेकर विद्यालय भवन का निर्माण कराया जा सकता है।