मौसमी बीमारियों ने भी पैर पसारना शुरू कर दिया है लेकिन हालात से निपटने में जिले की सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं पर्याप्त नहीं प्रतीत हो रही हैं। जिला अस्पताल से लेकर सीएचसी, पीएचसी तक डॉक्टरों की लंबे अरसे से कमी बनी हुई है। ऐसे में अस्पतालों में पहुंचने वाले मरीजों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
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16 डॉक्टरों के सहारे जिला अस्पताल
यदि जिला अस्पताल पर गौर करें तो यहां 27 में से सीएमएस समेत कुल 16 डाक्टर तैनात हैं। इसमें भी दो डॉक्टर वीआरएस के लिए आवेदन कर चुके हैं। पर्याप्त डॉक्टर न होने से यहां की स्वास्थ्य सेवाएं अकसर बेपटरी ही रहती है। रोजाना एक हजार तक ओपीडी करने वाले इस अस्पताल में चंद डाक्टर मरीजों का किस तरह का इलाज करते होंगे, यह एक बड़ा सवाल है।
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सीएचसी, पीएचसी में भी डॉक्टरों का टोटा
सरकारी चिकित्सकीय सेवाओं की चर्चा करें तो जिले में सात सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, एक अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 20 न्यू पीएचसी व तीन नगरीय स्वास्थ्य केंद्र हैं। इनमें डॉक्टरों के 99 पद सृजित हैं। 99 के सापेक्ष मात्र 77 डाक्टरों की तैनाती है। इनमें विशेषज्ञ डॉक्टरों की भी खासी कमी है। यही वजह है कि ग्रामीण अंचल के मरीज भी सीएचसी व पीएचसी पर न जाकर सीधे जिला अस्पताल पहुंचते हैं।
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दो ने दिया इस्तीफा, 22 का अता पता नहीं
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो सरकारी अस्पतालों में 77 डॉक्टर तैनात है, लेकिन इनमेें 22 डॉक्टर, जिसमें कुछ ट्रेनिंग पर कुछ लंबे अरसे से नदारद चल रहे हैं। ऐसे में करीब 20 लाख की आबादी वाले इस जिले में महज 53 डाक्टर ही मरीजों का इलाज कर रहे हैं। महकमे ने भी इस संबंध में शासन को सूचना देने के बाद अपना पल्ला झाड़ लिया। वहीं दो डॉक्टर इस्तीफा दे चुके हैं।
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वर्जन:
डॉक्टरों की कमी के बाबत लगभग हर महीने सूचना शासन को भेजी जाती है। फिलहाल सीमित संसाधनों से बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के प्रयास जारी हैं। जो डॉक्टर लंबे अरसे से गैरहाजिर हैं, उनके बारे में भी शासन को अवगत कराया जा चुका है।
- डॉ. ओपी सिंह, सीएमओ