सीमा से सटे बंदरबोझ, सुंदरनगर व बूंदीभूड़ गांवों के लोगों को रमनगरा बिजलीघर बन जाने के बावजूद आज भी बिजली के लिए तरसना पड़ रहा है। प्रदेश के विभाजन से पूर्व उत्तराखंड से ही इन गांवों बिजली मिलती थी।
पूर्व में ग्रामपंचायत बूंदीभूड़ में नेपाल सीमा से सटा थारू जनजाति गांव सुंदरनगर व बंदरबोझ था। मात्र एक थारू ग्रामपंचायत होने के चलते जिला प्रशासन व प्रदेश की सरकारें यहां अधिक ध्यान देती थीं। पूर्व में माधोटांडा बिजलीघर से 35 किलोमीटर लंबी बिजली लाइन डालकर यहां बिजली पहुंचाई गई थी, लेकिन यह सबकुछ अधिक समय तक नहीं रह सका। लंबी दूरी होने के कारण लाइनों में फाल्ट होने लगे और लाइनें जर्जर हो गई। चूंकि यह गांव उत्तराखंड की सीमा से सटा है। इसलिए खटीमा से इस गांव को बिजली सप्लाई दी गई, लेकिन कुछ सालों के बाद वहां से भी सप्लाई बंद कर दी गई।
बिजली घर बनने के बाद भी नहीं मिली बिजली
रमनगरा बिजलीघर का निर्माण शुरू हुआ। जब बिजलीघर चालू हुआ तो यह माना जा रहा था कि इन गांवों के लोगों को बिजली मिल जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बूंदीभूड़ के आधे भाग में एसएसबी कैंप तक बिजली सप्लाई दी जा रही है, लेकिन बंदरबोझ व सुंदरनगर की बिजली लाइनें ठीक नहीं की गई।
बिजली सप्लाई से पहले पहुंचे बिल
बूंदीभूड़ के करीब 20 से अधिक ग्रामीणों ने विद्युत कनेक्शन कैंप में 2500 रुपये प्रति कनेक्शन के हिसाब से धनराशि जमा ऱ्र कनेक्शन लिए थे। बताते हैं कि यहां ट्रांसफार्मर ही नहीं रखा गया। जिसके चलते आज तक ग्रामीणो को बिजली नहीं मिल सकी। परेशानी यही खत्म नहीं हुई करीब छह माह से ही यहां बिजली के बिल पहुंचने लगे।
इन गांवों में बिजली लाइनें जर्जर है। नई बिजली लाइनों को लेकर स्टीमेट पूर्व में ही तैयार किया जा चुका है, आचार संहिता खत्म होते ही बिजली पहुंचाने के प्रयास शुरू कर दिए जाएंगे। बिल की कोई जानकारी नहीं है।
उमेश कुमार, अवर अभियंता