शासन ने जिले की सड़कों को 15 जून तक गड्ढा मुक्त करने का आदेश तो जारी कर दिया है लेकिन रकम अब तक नहीं दी है। ऐसे में तय वक्त में काम पूरा होना मुश्किल लग रहा है। जिले में लगभग 500 सड़कें गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। इनमें से 300 का जीर्णोद्धार होना है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश की सड़कों को बरसात से पूर्व 15 जून तक गड्ढा मुक्त करने का फरमान जारी किया है। इसके बाद कुछ सड़कों पर काम भी शुरू किया गया है, लेकिन जिले की जर्जर सड़कों का निर्धारित समय सीमा के भीतर गड्ढामुक्त होना मुश्किल लग रहा है। शासन से निर्देश मिलने के बाद पीडब्ल्यूडी के दोनों खंडों के अधिशासी अभियंताओं ने जिले की सड़कों की मरम्मत के लिए प्रस्ताव बनाकर डीएम के माध्यम से शासन को भेजा है। इसमें दोनों खंडों की लगभग 300 सड़कें शामिल हैं। करीब 200 सड़कें अन्य विभागों आरईएस, जिला पंचायत, गन्ना एवं मंडी समिति की ओर से बनाई गई है। हालांकि इन सड़कों में लगभग 150 सड़कें ऐसी भी हैं जिनपर केवल पैच वर्क होना है। इन पर काम भी शुरू करा दिया गया है लेकिन अधिक मरम्मत या जीर्णोद्धार के लिए धनराशि आवंटित न होने से टेंडर नहीं हो पा रहे हैं। कब टेंडर होंगे और कब काम शुरू होगा, यही अभी तय नहीं है तो फिर 15 जून तक जिले की सड़कें कैसे गड्ढा मुक्त हो पाएंगी। हालांकि अधिकारी धन की स्वीकृति मिलते ही काम शुरू कराकर समय सीमा में पूरा करने का दावा कर रहे हैं।
14 महीने में भी नहीं बन सका कलक्ट्रेट मार्ग
टनकपुर रोड से कलक्ट्रेट के मेन गेट तक करीब 200 मीटर मार्ग को डिवाइडर युक्त बनाने का काम मार्च, 2015 में शुरू हुआ था लेकिन काम की गति ऐसी है कि कछुआ भी शरमा जाए। 200 मीटर यह मार्ग 14 महीने में भी नहीं बन सका है। जिस हिसाब से निर्माण चल रहा है उसे देखकर तो नहीं लगता कि यह काम आगे दो महीने में भी पूरा होता नहीं दिख रहा। कलक्ट्रेट के मेन गेट पर चल रहे काम का यह हाल है तो जिले के बाकी स्थानों पर निर्माण कैसे तय वक्त में पूरा हो पाएगा।