5.23 लाख रुपये का गबन
टीम ने गांव जाकर स्थलीय निरीक्षण किया और ग्रामीणों की बैठक का आरोपों को लेकर बयान लिए। जांच के दौरान ग्राम पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर 5.23 लाख रुपये के सरकारी धन का दुरुपयोग होने की पुष्टि करते हुए रिपोर्ट सौंपी गई। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद प्रधान सहित सचिव को नोटिस जारी किया गया, लेकिन इसमें कोई संतोषजनक जवाब नहीं आया।
इस पर जिलाधिकारी प्रवीण कुमार लक्षकार ने गांव में प्रधान के अधिकारों को सीज कर दिया। अब जिलाधिकारी ने ग्राम पंचायत में प्रधान का पद रिक्त करने के आदेश जारी किए हैं। इससे गोंछ की ग्राम प्रधान वंदना वर्मा की प्रधानी चली गई है। डीएम ने प्रधान और सचिव सहित अन्य कर्मियों से सरकारी धन की वसूली करने के निर्देश भी जारी किए हैं।
ये लोग भी कार्रवाई की जद में
पूरे प्रकरण की जांच के बाद जहां वंदना वर्मा को प्रधान पद से हाथ धोना पड़ा है, तो वहीं इस मामले में गांव के सचिव भगवान स्वरूप, रोजगार सेवक ओमकार, तकनीकी सहायक मोहम्मद कयूम, लघु सिंचाई विभाग के अवर अभियंता नदीम मलिक के विरुद्ध भी विभागीय कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए है।
एकतरफा की गई है कार्रवाई : वंदना
कार्रवाई को लेकर प्रधान वंदना वर्मा का कहना है कि इसको लेकर उन्होंने कोर्ट से आदेश कराया था। इसमें कहा गया था कि मामले की दोबारा से जांच कराई जाए। इसकी जानकारी देने के बाद भी उनकी एक न सुनी गई। यह एकतरफा कार्रवाई है।
जिला पंचायत राज अधिकारी वाचस्पति झा ने कहा कि जांच में ग्राम पंचायत गोंछ की प्रधान वंदना वर्मा को पद मुक्त करते हुए गांव में प्रधान का पद रिक्त कर दिया गया। अब शासन स्तर से होने वाले निर्णय के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामले में प्रधान, सचिव से रिकवरी कराई जा रही है।