गन्ना भुगतान समय से न होने और घटतौली से परेशान किसानों का मोह गन्ने से
भंग होने लगा है। इससे किसानों ने गन्ने के स्थान पर गेहूं व अन्य फसलों को
लगाना शुरू कर दिया है। अनुमान के मुताबिक 40 प्रतिशत रकबा घट सकता है।
तराई
के जनपद में चार चीनी मिलें होने के बाद भी किसानों की दशा नहीं सुधर रही
है। दो सहकारी मिलों की स्थिति अच्छी न होने और बरखेड़ा स्थित बजाज मिल से
भुगतान न मिलने से परेशान हैं। पूरनपुर स्थित सहकारी चीनी मिल आए दिन खराबी
के कारण खड़ी हो जाती है।
गन्ना रकबा घटने का दूसरा सबसे बड़ा कारण मिलों
की मनमानी है। इस बार अर्र्ली एवं सामान्य के रिजेक्ट बताकर क्रय केंद्र से
लौटाने के मामले प्रकाश में आ रहे हैं। किसानों को समय से भुगतान न मिलने,
पर्ची वितरण में गड़बड़ी, माफियों के हाबी होने और औसत उपज ठीक न होने के
कारण किसान अब गन्ने से मुंह मोड़ते दिख रहे हैं।
किसानों ने बताया गन्ने
की खेती उनके लिए समस्या बनती जा रही है और वह गेहूं व अन्य खेती की ओर रुख
कर रहे हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार इस बार गन्ने का रकबा 40 प्रतिशत
तक घट सकता है।