पीलीभीत। बीते माह हुई इन्वेर्स्ट्स समिट में जिले में उद्योग लगाने के लिए लेकर रणनीति बनाई गई। उद्यमियों को पीलीभीत का प्राकृतिक नजारा बेहद अच्छा लगा, नहरों का जाल व जंगल होने के कारण पर्यटन उद्योग में भी लोगों ने दिलचस्पी दिखाई। 162 प्रस्तावों पर हस्ताक्षर हुए। इसके बाद उद्योगों को शुरू करने की तैयारी शुरू हुई। उद्यागों के लिए कम से कम 150 एकड़ जमीन की जरूरत थी, जबकि प्रशासन के लैंड बैंक में 4.808 हेक्टेयर जमीन उपलब्ध निकली, वह भी टुकड़ों में। ऐसे में सपनों को साकार करने में जमीन की कमी आड़े आ गई।
जिले में 300 करोड़ का इथेनॉल प्लांट लगना है। इसके अलावा ई बाइक का प्रोजेक्ट है। होटल टूरिज्म के लिए भी उद्यमियों ने सहमति दी है लेकिन इन सब को मूर्त रूप देने के लिए जमीन चाहिए। अकेले इथेनॉल के प्लांट के लिए 130 एकड़ जमीन की जरूरत है। इसी तरह ई-बाइक के प्रोजेक्ट के लिए भी करीब चार-पांच एकड़ तो छोटे उद्योगों के लिए भी चार-पांच एकड़ जमीन चाहिए।
जमीन की दिक्कत दूर करने के लिए डीएम ने पूरनपुर एसडीएम आशुतोष गुप्ता को लैंड बैंक बनाने का जिम्मा सौंपा। तय किया गया कि पूरनपुर तहसील क्षेत्र में जहां-जहां सड़क किनारे ग्राम समाज की जमीन खाली पड़ी है उसे चिहिन्त किया गया। एसडीएम ने लेखपालों की टीमें लगाकर पूरे तहसील क्षेत्र में जमीन को खोजवाया। जमीन मिली भी लेकिन इससे उद्योगों का भला नहीं हो पाया। वजह यह रही कि जमीन अलग-अलग गांव में थी, वह भी कहीं एक तो कहीं दो बीघा। जबकि उद्यमियों को एक ही जगह पर कई एकड़ जमीन की जरूरत थी। बावजूद इसके अफसरों का कहना है कि वे हिम्मत नहीं हारे हैं, लगातार तलाश जारी है।
पीटीआर से सटे इलाके में एकाएक बढ़े जमीनों के भाव
इन्वेस्टर्स समिट के बाद एकाएक टाइगर रिजर्व के आसपास के गांवों में जमीन के दाम बढ़ गए हैं। एक-दो महीने पहले जो जमीन महज सात-आठ लाख रुपये बीघा थी, अब वह 16-17 लाख रुपये प्रति बीघा हो गई है। दरअसल होटल टूरिज्म से जुड़े लोगों को टाइगर रिजर्व के आस-पास ही जमीन चाहिए, वहीं होटल व्यवसाय चल भी पाएगा। ऐसे में उद्यमियों की गाड़ियां जब गांवों में जानी शुरू हुईं तो एकाएक जमीन के भाव भी बढ़ने शुरू हो गए। नहर किनारे कुछ स्थानों पर तो जमीन के भाव 20 लाख रुपये प्रति बीघा तक पहुंच गए। इनमें पीटीआर से सटे गांव माधोटांडा, ढगा, पिपरिया संतोष, मेनाकोट, मल्लपुर, मुस्तफाबाद, बराही आदि शामिल हैं।
पूरनपुर छोड़कर किसी दूसरी जगह नहीं जाना चाहते उद्यमी
जमीन को लेकर दिक्कत इसलिए भी आ रही है कि उद्यमी पूरनपुर क्षेत्र को छोड़कर किसी दूसरे क्षेत्र में उद्योग लगाने के इच्छुक नहीं हैं। उनकी प्राथमिकता पूरनपुर व उसके आसपास का इलाका है। बीसलपुर, दियोरिया, हजारा जैसे क्षेत्र में उद्यमी नहीं जाना चाह रहे।
जिल में अधिकांश जमीन खेतिहर
पीलीभीत कृषि प्रधान जिला है। 2011 की जनगणना के मुताबिक जिले में 2,22,160 किसान परिवार हैं। एक परिवार में करीब चार से पांच लोग माने जाते हैं। जिले की जनसंख्या करीब 21 लाख थी। इसमें 1.42 लाख हेक्टेयर जमीन पर गेहूं की फसल होती है। 1.05 हेक्टेयर पर गन्ने की और करीब 15 हजार हेक्टेयर पर सब्जियां होती हैं। ऐसे में यहां ज्यादा जमीन की संभावना कम है। जो जमीन है वह खेतिहर है।
इन्वेस्टर्स समिट के दौरान उद्यमियों ने जमीन की समस्या की बात रखी थी। इसकी तलाश की जा रही है। सभी विभागों का सहयोग लिया जा रहा है। जल्द ही यहां उद्योग लगने शुरू हो जाएंगे।
- आत्मदेव शर्मा, उपायुक्त, उद्योग
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जमीन के लिए लैंड बैंक बनाया गया है। पूरनपुर तहसील के करीब 34 गांवों में अलग-अलग जगह 4.808 हेक्टेयर जमीन ढूंढी जा चुकी है और प्रयास किए जा रहे हैं।
- आशुतोष गुप्ता, एसडीएम पूरनपुर