पीलीभीत। लॉकडाउन के दौरान करीब साढ़े तीन महीने से ठप विकास कार्यों पर अब मानसून की बरसात का ग्रहण लगने जा रहा है। मौसम विभाग ने मानसून जल्द ही आने की भविष्यवाणी की है। ऐसे में अब तक लॉकडाउन की वजह से जो प्रोजेक्ट रुके थे, वे अब मानसूनी बरसात की वजह से चार महीने तक ठप रहेंगे।
हाल ही में जो काम शुरू भी हो गए हैं, उनके निर्माण कार्यों की गति 20 से 30 फीसदी ही है। बरसात के दौरान सड़क निर्माण समेत तमाम प्रोजेक्ट के काम नहीं हो पाएंगे। पीडब्ल्यूडी और नगरपालिका समेत विभिन्न एजेंसियों ने हाल ही में सड़कों का निर्माण शुरू कराया है। मगर, अब बारिश के चलते इनके कामों की गति नहीं बढ़ पाएगी। अब तक लॉकडाउन की वजह से जिला योजना समिति की बैठक तक नहीं हो पाई। कोरोना संक्रमण काल में नगरपालिका, पीडब्ल्यूडी, आरईएस समेत विभिन्न विभागों के कामों की रफ्तार धीमी हो गई है।
बरसात में कैसे पूरा होगा 28 सड़कों का काम
शासन द्वारा जनपद में 28 सड़कों के निर्माण को स्वीकृति मिली थी। लोक निर्माण विभाग द्वारा 1.30 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली सड़कों का निर्माण कार्य तो जैसे तैसे शुरू करा दिया गया, लेकिन अभी इन सड़कों पर 25 फीसदी काम ही हो पाया है। अब मानसून सीजन सिर पर है। पीडब्ल्यूडी एक्सईएन हरस्वरूप सिंह का कहना है कि सड़कों का निर्माण चल रहा है। मगर, बरसात में जारी रह पाना मुश्किल है।
नगरपालिका की सड़कों का निर्माण भी थमा
नगरपालिका द्वारा शहर की तीन सड़कों का निर्माण कराया जाना है। इसमें तीन ट्यूबवेल की मरम्मत भी है। इस पूरे प्रोजेक्ट पर 1.30 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं। इसमें नौगवा चौराहा से लकड़ी मंडी पुल से आगे तक, गौहनिया चौराहेे से सुनगढ़ी थाने समेत तीन सड़कों का निर्माण शुरू नहीं हो पाया है। नगरपालिका के निर्माण अनुभाग के अनुसार, दो-चार दिन में काम शुरू हो जाएगा। हालांकि तब तक मानसूनी बरसात भी शुरू हो चुकी होगी।
पीडब्ल्यूडी की 52 सड़कों का काम भी अटका
शासन द्वारा गत वर्ष जनपद में 52 सड़कों के निर्माण को स्वीकृति मिली थी। लोक निर्माण विभाग ने 7.20 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली इन सड़कों के निर्माण पूर्व में शुरू करा दिए थे, मगर लॉकडाउन और बारिश के चलते उसे रोकना पड़ा। इधर, अब बजट की कमी के चलते 52 सड़कों का काम जहां का तहां रुका पड़ा है। अधिशासी अभियंता पीडब्ल्यूडी का कहना है कि शासन को डिमांड भेजी गई है।
721 ग्राम पंचायतों में बनने हैं सामुदायिक शौचालय
स्वच्छ भारत मिशन के तहत लॉकडाउन से पूर्व जिले की सभी 721 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालयों का निर्माण कराने के आदेश दिए गए थे, मगर लॉकडाउन के चलते यह प्रक्रिया रोक दी गई थी। इधर, अब दोबारा ग्राम निधि से बनने वाले इन शौचालयों के लिए जमीन का चयन किया जा रहा है। बरसात होने पर इन शौचालयों का निर्माण कार्य भी प्रभावित होगा।
जिला पंचायत के 25 करोड़ के कामों में हुई देरी
जिला पंचायत की लापरवाही के चलते पिछले वित्तीय वर्ष में होने वाले 25 करोड़ रुपये के काम हो पाना एक सपने जैसा हो गया है। टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोपों पर शासन ने उन्हें निरस्त कर दिया था। इसके बाद दोबारा टेंडर कराने के आदेश दिए थे। तभी लॉकडाउन लागू हो गया। तबसे कोई काम शुरू नहीं हो पाया। हाल ही में अब टेंडर प्रक्रिया दोबारा शुरू हुई तो जिला पंचायत अध्यक्ष आरती महेंद्र ने टेंडरों को निरस्त करने के आदेश दे दिए हैं। हालांकि प्रशासन के आदेश पर इन टेंडरों को मान्य मानकर निर्धारित 15 जून को खोल लिया गया। मगर पूरी प्रक्रिया निपटने में लंबा समय लगेगा। तब तक मानसून दस्तक दे देगा।
श्रमिकों को काम देने में बारिश बनेगी रोड़ा
लॉकडाउन में छूट मिलने के बाद से ही मनरेगा कार्य शुरू किए जा चुके हैं। सरकार भी लॉकडाउन के दौरान बेरोजगार हुए श्रमिकों को काम देने पर जोर दे रही है। जिले में करीब 74 हजार श्रमिकों को काम भी मिल चुका है। इसमें दस हजार से अधिक प्रवासी श्रमिक शामिल हैं। इधर, कन्वर्जेंस वाले 18 विभाग भी श्रमिकों से काम कराने की कार्ययोजना तैयार कर चुके हैं। मगर बरसात में श्रमिकों को काम देने की योजना भी प्रभावित हो सकती है।
मनरेगा में अधिक से अधिक श्रमिकों को काम दिए जाने की कार्ययोजना बनी है। इसमें 18 विभाग कन्वर्जेंस में कार्ययोजना बनाकर रोजगार देने की रणनीति बना चुके हैं। बरसात की सीजन में भी कुछ न कुछ काम चलते रहेंगे। - श्रीनिवास मिश्र, सीडीओ