नगर पालिका प्रशासन नागरिकों को सुविधाएं देने में तो पीछे है ही, वहीं शासन द्वारा दी जाने वाली योजनाओं को लागू करने में भी नाकाम साबित हो रही है। बानगी के तौर पर यदि स्वकर निर्धारण प्रक्रिया की बात करें तो पालिका प्रशासन द्वारा इसे चार साल बाद भी लागू नहीं किया जा सका है। पुराने पैटर्न पर ही करों की वसूली की जा रही है।
पारदर्शिता को लागू की गई स्वकर प्रक्रिया
नगर पालिका की टैक्स प्रक्रिया को लेकर मनमानी के आरोप लगते आ रहे थे। शासन ने इस प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए करीब चार साल पहले स्वकर निर्धारण प्रक्रिया का शासनादेश जारी किया था। इसमें उपभोक्ता द्वारा ही गृह व जलकर का निर्धारण किया जाना था।
दरें कम होने से फंसा पेंच
स्वकर निर्धारण को लागू करने के लिए करीब चार माह पूर्व बोर्ड में प्रस्ताव रखकर एक कमेटी का गठन किया था। जिसके बाद विज्ञप्ति जारी कर आपत्तियां मांगी गई थी। चूंकि रेट इतना कम था कि टैक्स विभाग के लिए चार करोड़ का लक्ष्य पार करना नामुमकिन था। इस पर टैक्स विभाग ने आपत्ति जताई। इसके बाद पुन: कमेटी का गठन किया गया। जिसमें टैक्स विभाग के दो अधिकारी व दो पालिका बोर्ड के सदस्य शामिल किए गए, लेकिन अभी तक यह प्रक्रिया अधर में लटकी हुई है। हालांकि पालिका प्रशासन द्वारा पुरानी दरों पर ही टैक्स की वसूली की जा रही है।
आंकड़ों में भी समानता नहीं
शासन ने नगरपालिका में वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार 37500 उपभोक्ताओं से स्वकर प्रक्रिया के तहत वसूली करने के आदेश दिए थे, जबकि पालिका के आंकड़ों में मात्र 24800 उपभोक्ताओं से ही करनों की वसूली की जानी है।
ऐसे होता है कर का निर्धारण
वर्तमान कर व्यवस्था के तहत भवन की कुल वैल्यूशन के मुताबिक 10 प्रतिशत वाटर टैक्स व पांच प्रतिशत गृहकर की वसूली की जा रही है। जबकि स्वकर प्रक्रिया के तहत 10 पैसे से 22 पैसे प्रति स्क्वायर फिट दर तय की गई थी।
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पूर्व में बोर्ड द्वारा जो दरें तय की गई थी, उससे आवंटित वसूली लक्ष्य को तय करना मुश्किल था। अब कमेटी द्वारा नई दरों का निर्धारण किया जा चुका है। जल्द ही नई प्रक्रिया से वसूली की जाएगी।
अमरमणि त्रिपाठी, प्रभारी अधिशासी अधिकारी