कस्बा टिकरी में गलत स्थान पर बनाया गया उपमंडी स्थल तीन वर्षों से वीरान हालत में है। टिनशेड में महिलाएं उपले थोप रही हैं और दुकानों में भूसा भरा हुआ है। इससे लोगों को लाभ भी नहीं मिल पा रहा है और विभाग का करीब एक करोड़ रुपया भी बेकार हो गया है।
क्षेत्रीय जनता की बेहद मांग पर कृषि उत्पादन मंडी परिषद ने वर्ष 2013 में कस्बा टिकरी में करीब एक करोड़ रुपये की लागत से उपमंडी स्थल (एग्रीकल्चरल मार्केटिंग हब) बनवाया गया था। करीब एक एकड़ जमीन पर बनवाए गए इस उपमंडी स्थल में एक बड़ा टिनशेड और 20 दुकानें बनवाई गई थीं। सुरक्षा के लिहाज से उपमंडी स्थल की चाहरदीवारी भी बनवाई गई थी। उपमंडी स्थल में एक इंडिया मार्का हैंडपंप लगवाया गया था और शौचालय, मूत्रालय भी बनवाया गया था। उपमंडी स्थल गलत स्थान पर बनने के कारण आज तक यहां मंडी शिफ्ट नहीं हो पाई है। दरअसल, यह उपमंडी स्थल मेनरोड और कस्बे से कुछ दूरी पर है। कस्बे की मंडी पुराने स्थान पर ही चल रही है। उपमंडी स्थल में मंडी शिफ्ट न हो पाने के कारण टिनशेड में महिलाओं ने उपले थोपने शुरू कर दिए हैं। दुकानों में लोगों ने अवैध रूप से भूसा भर रखा है। कुछ शरारती तत्वों ने चाहरदीवारी दो स्थानों पर बुरी तरह से क्षतिग्रस्त कर रखी है और तोड़ी गई चाहरदीवारी की ईंटें भी गायब कर ली हैं। रात के समय उपमंडी स्थल में असामाजिक तत्व शरण लेते हैं। दिन के समय जुआरी जुआ खेलते हैं। इस प्रकार यह उपमंडी स्थल पिछले तीन वर्षों से वीरान हालत में पड़ी है। लोगों को इस योजना से लाभ भी नहीं मिल पा रहा है और विभाग की मंशा भी पूरी नहीं हो पा रही है।
इस बावत मंडी सचिव सुशील कुमार ने बताया कि वर्ष 2013 में तत्कालीन मंडी सचिव मलखान सिंह के कार्यकाल में यह उपमंडी स्थल बनवाया गया था। उच्चाधिकारियों को स्थिति से अवगत करा दिया गया है।