कलीनगर। केंद्र और प्रदेश सरकार ने तराई में एलिफेंट रिजर्व बनाने की मंजूरी दी है। इसके विस्तार की वन्यजीव प्रेमी ने मांग उठाई है। पर्यावरण मंत्री को सात बिंदुओं पर रिपोर्ट भेजकर हाथियों का मार्ग दर्शाकर राजाजी पार्क को भी शामिल करने की मांग की है।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व से हाथियों का रिश्ता दशकों पुराना है। नेपाल और राजाजी नेशनल पार्क से हाथियों का झुंड पीलीभीत और दुधवा तक चहलकदमी करता रहा है। हाथियों पर काम कर रहे वन्यजीव प्रेमी डॉ. टीएच खान ने पर्यावरण मंत्री भुपेंद्र यादव को भेजे पत्र में कहा कि सरकार का तराई एलिफेंट रिजर्व को मंजूरी देना काफी सराहनीय पहल है, लेकिन हाथियों को बेहतर सहूलियत देने में रूट का विस्तार करना जरूरी है।
बताया कि पीटीआर और दुधवा में वर्तमान में हाथी दो दिशाओं से प्रवेश करते हैं। इसमें एक नेपाल और दूसरी उत्तराखंड के नन्धौर वन्य जीव विहार की दिशा हैं। करीब 50 वर्ष पूर्व की बात करें तो हाथी राजाजी नेशनल पार्क (हरिद्वार, देहरादून वन्य क्षेत्र आदि) से दुधवा नेशनल पार्क तक आवाजाही करते थे।
इसके लिए हाथियों का झुंड राजाजी से निकलकर रामनगर, लालकुआं पंतनगर, किशनपुर रेंज, दानी बंगर वन क्षेत्र तराई पूर्वी वन प्रभाग हल्द्वानी, उत्तराखंड वन्य जीव विहार, बनबसा चकरपुर की ओर से पिलर नंबर 17 जनपद सीमा के सुंदर नगर के रास्ते नेपाल वन्य जीव विहार, नेपाल से होकर पीटीआर और दुधवा तक जाते थे, लेकिन दखलंदाजी बढ़ने से दो क्षेत्रों में बंट गए।
ऐसे में राजाजी पार्क के हाथी पीटीआर नहीं आ पा रहे। इसके चलते रास्ता भटककर हाथी आबादी क्षेत्र में पहुंचते हैं। जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष भी होता है। ऐसे में जरूरी है कि हाथियों के पुराने रूट को भी एलिफेंट रिजर्व में शामिल किया जाए।