पीलीभीत-भोजीपुरा रेल मार्ग पर ब्राडगेज कंवर्जन के चलते बरेली रूट पर
ट्रेनों का संचालन बंद हो चुका है। इसके चलते यात्रियों का भार अब परिवहन
विभाग के ऊपर बढ़ गया है। परिवहन विभाग 83 बसों के सहारे ही बेहतर व्यवस्था
देने का दावा कर रहा है, जबकि सच्चाई यह है कि रोडवेज का आसरा दैनिक
यात्री छोड़ते नजर आ रहे हैं। रोडवेज बसों के माध्यम से पीलीभीत से दिल्ली
तो जाना आसान है, लेकिन तहसीलों मेें पहुंचना अब दूभर हो चला है।
यह हैं परिवहन व्यवस्था का हाल
रोडवेज
डिपो की 83 बसों में आधे से अधिक बसें दिल्ली रूट पर संचालित की जा रही
है। जिससे जिला मुख्यालय से नगर और कस्बों में जाने वाले यात्रियों को
सरकारी बस सेवा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। पूरनपुर, बीसलपुर, माधोटांडा,
अमरिया आदि से जिला मुख्यालय आने व जाने के लिए रोडवेज बसों का टोटा है।
पूरनपुर रूट की बात करें तो यह सुबह और शाम को एसी बस सेवा संचालित हैं,
लेकिन इनकी संख्या कम और किराया अधिक होने से यह आम आदमी के बूते से बाहर
है। पूरे दिन इस रोड पर मैजिक वाहन ही सवारियों को ढो रहे हैं। कमोबेश यही
हाल बीसलपुर रोड का है। यहां मात्र तीन साधारण बसें चल रही हैं, लेकिन
यात्रियों की संख्या को देखते हुए यह भी नाकाफी हैं। तराई क्षेत्र की जनता
माधोटांडा होकर जिला मुख्यालय तक आती है, लेकिन माधोटांडा रोड पर एक भी
रोडवेज बस नहीं है। यहां भी मैजिक वाहनों के सहारे आवागमन हो रहा है।
सरकारी तंत्र से ज्यादा भरोसा प्राइवेट तंत्र पर
जिला
मुख्यालय से बरेली व वहां से जिला मुख्यालय तक आने वाले दैनिक यात्रियों
की संख्या सर्वाधिक है। इस रूट पर सबसे ज्यादा रोडवेज बसें चलाई जा रही है,
लेकिन शुरूआती दौर में ही इस रूट पर बस सेवा लड़खड़ा गई। कुछ दैनिक
यात्रियों ने मासिक किराया तय कर प्राइवेट बसों से चलना शुरू कर दिया, शेष
यात्री छोटे चौपहिया वाहनों के सहारे अपनी दैनिक यात्रा पूरी करते हैं।
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एक
जनवरी से ट्रेनों का संचालन बंद होने के बाद डिपो द्वारा पूरी तैयारी की
गई थी, लेकिन यात्रियों की तादाद जिस तरह बढ़नी चाहिए थी, नहीं बढ़ी। इनकम
में मामूली वृद्धि हुई है।
- एसके वर्मा, एआरएम, परिवहन विभाग