कस्बा बमरोली में दिमागी बुखार से जहां कई बच्चे पीड़ित हैं। वहीं सोमवार को एक और आठ वर्षीय बालक की इसी बीमारी की चपेट में आने से मौत हो गई। तीन दिन के अंतराल में मौत की हुई दूसरी घटना के बावजूद स्वास्थ्य विभाग का कोई भी कर्मचारी गांव नहीं पहुंचा। नतीजतन आर्थिक तंगी के चलते घरवाले गांव के ही झोलाछाप के यहां इलाज कराने को विवश हैं।
कस्बा निवासी सियाराम पासवान ने बताया कि उसकी बेटी गंगादेवी शाहजहांपुर के आटा बजरिया में ब्याही है। 15 दिन पूर्व वह मायके आई। बताते हैं कि गांव में फैले दिमागी बुखार की चपेट में बेटी का आठ वर्षीय बेटा ललित भी आ गया। जिसका गांव के ही एक झोलाछाप के यहां इलाज कराया। उपचार होने के बावजूद उसकी हालत में सुधार होने की बजाय बिगड़ती चली गई। रविवार को उपचार के दौरान ही उसकी मौत हो गई।
बता दें कि पांच सितंबर को इसी मोहल्ले के महेश पासवान के पुत्र विजय की भी दिमागी बुखार की वजह से मौत हो गई थी। तीन दिन के अंतराल में दूसरी घटना होने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग सजग नहीं हुआ। उधर, इसी मोहल्ले के गंगाराम की पुत्री खुशबू, प्राशी, हेमराज का पुत्र सोम, शत्रु और पुत्री सिमरन, शिवसरन का पुत्र सोनू, वीरपाल की पुत्री काजल, दोदराम का पुत्र विकास और जगवीर की पुत्री मानसी दिमागी बुखार की चपेट में हैं। ग्रामीणों का कहना है कि आर्थिक तंगी की वजह से वह लोग गांव के ही झोलाछाप के यहां इलाज करा रहे हैं।
उधर, सीएचसी अधीक्षक डा. श्रीराम का कहना है कि उन्हें कोई सूचना नहीं मिली है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर दिमागी बुखार से कोई पीड़ित है तो उसे अस्पताल लाना चाहिए। झोलाछाप इलाज के नाम पर जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं।