पीलीभीत। घरों और खेतों के ऊपर से गुजर रहे हाईटेंशन लाइन के तारों का पावर कॉरपोरेशन के पास कोई समाधान ही नहीं है। आए दिन तार टूटकर हादसों का सबब बनते हैं। कई लोगों की जान जा चुकी है। हर साल फसलों का 50 लाख से अधिक का नुकसान होता है। समस्या बड़ी है, मगर इसका हल कोई नहीं तलाशता। इतना जरूर है कि अगर कोई काम शुरू हो जाए तो जनप्रतिनिधि वोट बैंक के चक्कर में काम में अड़ंगा डालने से पीछे नहीं हटते।
शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों में हाईटेंशन लाइन के हालात बदतर हैं। शहर के लाल रोड, नई बस्ती, मेन मार्केट, खकरा, खुदागंज, आवास विकास कॉलोनी, अशोक कॉलोनी, एकता नगर समेत कई इलाकों में तार मकानों से सटे हुए हैं या छतों के ऊपर से जा रहे हैं। इनमें कई जगह हाईटेंशन लाइन भी है। गांवों में भी घरों और खेतों के ऊपर से हाइटेंशन लाइन मौत बनकर निकलती है। इसमें लापरवाही को लेकर नगर पालिका, प्रशासन और पावर कॉरपोरेशन एक दूसरे पर टाल जाते हैं। पावर कॉरपोरेशन का कहना है कि ये लाइनें पहल से हैं, बाद में नीचे खाली जगह में मकान बना दिए गए। उधर, प्रशासन चुप्पी साध लेता है। कोई यह बताने को तैयार नहीं होता कि आखिर इन लाइनों के नीचे मकान कैसे बन गए।
चूंकि मकान बनकर तैयार हो चुके हैं, अब उनको तो हटाया नहीं जा सकता। ऐसे में पावर कॉरपोरेशन के अधिकारियों के सामने हल सिर्फ एक है। बिजली की लाइनों को हटाकर नए रूट से निकाला जाए, मगर इसके लिए काफी बजट चाहिए। बिजली को मुद्दा बनाकर वोट पाने वाले जनप्रतिनिधि इस ओर कोई ध्यान नहीं देते। इस समस्या का समाधान तो छोड़िए..कभी इस मुद्दे को उठाया ही नहीं गया। नतीजतन हालात और बदतर होते जा रहे हैं। थोड़ी समस्या बिजली अफसरों के सामने भी है। बरखेड़ा की एक कॉलोनी में साल 2019 में घरों के ऊपर से निकलती लाइनें हटाकर दूसरी जगह शिफ्ट कराना शुरू किया तो उसके नीचे आ रहे प्लॉट वालों ने विरोध शुरू कर दिया। नेता भी अड़ंगा लगाने को सामने आ गए थे। हालांकि प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए काम पूरा कराया। अब जिले भर के तारों को बदलने के लिए अगर शासन ध्यान दे दे तो समाधान होने में देर नहीं लगेगी।
कई बार हो चुके हैं हादसे
खेतों के ऊपर से गुजरते हाईटेंशन लाइन के तारों से निकलने वाली चिंगारी और टूटकर तार गिरने से हर साल 50 लाख से अधिक की फसल जल जाती है। इसके अलावा लोगों की जान भी जा चुकी है। तीन साल पहले बरहा गांव के एक मजदूर की खेत पर टूटकर गिरे तार की चपेट में आकर करंट से जान चली गई थी। दो साल पहले नौगवां पकड़िया गांव में छत पर सूख रहे कपड़े उतारने पहुंचे दंपती की छत के ऊपर से गुजर रही हाइटेंशन की चपेट में आकर जान चली गई थी। बीते साल भी न्यूरिया और गजरौला में मकान के ऊपर से गुजरती बिजली की लाइन टूटकर गिरने से ग्रामीणों की जान चली गई थी। घरों के नजदीक से तार गुजरने से कई बार मकानों में करंट उतर आता है। रविवार को पूरनपुर में हाईटेंशन लाइन टूटकर गिर गई थी, हालांकि कोई इसकी चपेट में नहीं आया, मगर लोगों का गुस्सा फूटा था।
अफसर खुद बेबस..तारों को हटवाने के लिए बजट कहां से लाएं
पूरनपुर। आए दिन हादसों का कारण बन रही घरों के ऊपर से गुजरती हाइटेंशन लाइन का समाधान कराने के लिए पावर कॉरपोरेशन के अधिकारी खुद बेबस हैं। उनका एक ही तर्क है कि नए रूट पर लाइन डालना ही एकमात्र समाधान है। मगर इसके लिए काफी बजट चाहिए। अगर काम कराया भी जाए तो बजट कहां से आएगा। सर्वाधिक दिक्कत सब स्टेशन से शेरपुरकलां और लाइनपार इलाके में है। आबादी बढ़ी तो तारों के नीचे मकान बन गए। कुछ खंभे तो चहारदीवारी के भीतर पहुंच गए। इन्हें हटाने की मांग भी कई बार हुई, मगर पावर कॉरपोरेशन खुद बेबस है। अधिशासी अभियंता अरविंद कुमार का कहना है कि वर्तमान हालात को देखते हुए साफ है कि तार अब नहीं हटाए जा सकते। बजट स्वीकृत नहीं हो सकेगा। समस्या एक जगह नहीं, पूरे प्रदेश की है।
बारिश में बढ जाता है हादसे का खतरा
बीसलपुर। मोहल्ला पटेलनगर, दुर्गाप्रसाद में 50 से अधिक घरों के ऊपर से बिजली की लाइन गुजर रही है। सालों से इसके सुधार की मांग की जा रही। कई प्लॉट ऐसे हैं, जिनके ऊपर तार होने की वजह से निर्माण शुरू नहीं कराया जा सका। तार जर्जर हो चुके हैं। इससे लोगों को हादसे का डर सताता रहता है। मकान के पास तार होने से बारिश के समय अधिक खतरा होता है। समस्या का कोई समाधान अधिकारियों के पास नहीं है।
बिजली के तारों के नीचे मकान बन जाने से दिक्कत आई है। अब इसका एक ही समाधान है कि तारों को अलग करने के लिए नया रूट बनाया जाए। इसके लिए काफी बजट की जरूरत होगी। लोकल स्तर पर बीते दिनों बरखेड़ा में काम कराया गया था। जर्जर तारों को बदलने का काम भी कराया गया है। - असीम कुमार, अधिशासी अभियंता, पावर कॉरपोरेशन
खंभा टूटने से घंटों ठप रही बिजली
पूरनपुर। असम हाईवे पर सिरसा चौराहा के पास बस की टक्कर से बिजली का पोल टूट गया। इससे पंकज कॉलोनी समेत आसपास के इलाकों की बिजली गुल हो गई। सोमवार सुुबह अधिकारियों ने टीम भेजकर सुधार कराया। करीब पांच घंटे बाद सुधार कार्य पूरा होने पर सप्लाई शुरू की जा सकी।