बरखेड़ा (पीलीभीत)। सनातन धर्म में पूर्व काल से ही नारियों को देवी का रूप माना जाता है। नारी को साहित्य में बुद्धि और पुरुष को बल की संज्ञा दी गई है। आज की महिलाओं को अपनी शक्ति का एहसास करना होगा। तभी अपराजिता बनाकर उत्पीड़न का मुकाबला कर सकतीं हैं। यह बात कार्यकारी निदेशक/ प्राचार्य डॉ. एसके शर्मा ने अमर उजाला के अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स अभियान के तहत आयोजित निबंध और पोस्टर प्रतियोगिता के शुभारंभ अवसर पर कही। पोस्टर प्रतियोगिता में रेशू और निबंध में दिव्या शर्मा ने पहला स्थान प्राप्त किया।
एचआरपी डिग्री कॉलेज में सोमवार को अमर उजाला की अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स अभियान के तहत महिला सशक्तीरण विषय पर आधारित पोस्टर और निबंध प्रतियोगिताएं हुईं। प्रतियोगिताएं से पूर्व कॉलेज प्राचार्य ने छात्राओं को महिला सशक्तीकरण के प्रति जागरूकता की शपथ दिलाई और संकल्प पत्र भरवाए। पोस्टर प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल के प्राचार्य डॉ. एसके शर्मा, बरखेड़ा थाना प्रभारी बृज किशोर मिश्र और प्रवक्ता सीमा रानी ने सभी पोस्टरों का अवलोकन करने के बाद बीए तृतीय वर्ष की छात्रा रेशू को प्रथम, बीए प्रथम वर्ष की छात्रा निशा को द्वितीय और बीएससी द्वितीय वर्ष की छात्रा ममता शर्मा को तृतीय स्थान दिया। निबंध प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में शामिल प्राचार्य, प्रवक्ता राजश्री, सीमा रानी ने बीएससी द्वितीय वर्ष की छात्रा दिव्या शर्मा को प्रथम, बीए प्रथम वर्ष की छात्रा साक्षी शर्मा को द्वितीय, बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा पूनम को तृतीय स्थान दिया। प्रतियोगिता में 85 छात्राओं ने प्रतिभाग किया।
इस मौके पर प्रवक्ता राजश्री ने कहा कि महिलाएं खुद को सशक्त बनाएं तो उत्पीड़न से बच सकती हैं। हर विकसित देश में हमेशा 50 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी रही है। इस मौके पर अध्यक्ष मुकेश गुप्ता, प्रवक्ता कौशल गंगवार, राजीव चौहान, मीनाक्षी शंखधार मौजूद रहे।
कार्यक्रम में इन छात्राओं ने भी रखे विचार
छात्रा पूजा वर्मा, दिव्या शर्मा, संध्या, स्वाति, नीरज, साक्षी, जावित्री ने भी महिला सशक्तीकरण को लेकर अपने विचार प्रस्तुत किए और महिलाओं को जागरूक करने का संकल्प लिया।
सशक्त बनने के लिए अधिकारों की हो जानकारी
महिलाएं सशक्त तभी बन सकतीं है जब उनको खुद के अधिकारों की जानकारी हो। जिससे उन पर हो रहे अत्याचार को वे खुद रोके और निडर होकर जिंदगी जी सके।
- पूजा वर्मा, बीए द्वितीय वर्ष
ग्रामीण क्षेत्र में जागरूकता की ज्यादा जरूरत
बहुत सी महिलाएं ऐसी हैं, जिन्हें कानून और खुद के अधिकारों के बारे में जानकारी नहीं है। ऐसी महिलाएं ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा हैं। उन्हें जागरूक करना बहुत जरूरी है।
- अनु सक्सेना, बीए द्वितीय वर्ष
खुद के अंदर छिपी प्रतिभा को पहचानें
महिलाएं खुद के अंदर छिपी प्रतिभा को पहचानें और सशक्त बनें। तभी बुराइयों जैसे बाल विवाह, दहेज प्रथा आदि को रोक सकती हैं और समाज को एक नई दिशा दे सकतीं हैं।
- संध्या, बीए द्वितीय वर्ष
आधी आबादी होने के बाद भी अधिकारों से वंचित
आधी आबादी होने के बाद भी महिलाएं अपने अधिकारों से वंचित है। शिक्षा के बिना महिलाएं सशक्त नहीं बन सकतीं। कहां सम्मान और कहां अपमान हो रहा है इसका भी ध्यान रखें।
- स्वाति, बीए प्रथम वर्ष