पीलीभीत। संत निरंकारी मंडल की ओर से पूरनपुर रोड स्थित आश्रम में हुए सत्संग में महात्मा प्रेम ने कहा कि मानव ने अध्यात्म में जुड़कर अपने कर्मों से आत्मा का उद्धार करने का जो साधन अपनाया है, उसी का नाम पूजा है। कहा, पूर्ण परमात्मा से ही संपूर्ण प्राणियों को उत्पत्ति हुई है। जिसमें यह समस्त जगत व्यापक है। उस परमेश्वर को अपने स्वाभाविक कर्मों से पूजकर मनुष्य परम सिद्धि को प्राप्त हो जाता है। समस्त प्राणियों को समझना चाहिए कि अपने कर्तव्य कर्म में भगवान ने उसे नियुक्त किया है। पूर्ण परमात्मा की जानकारी पूर्ण जानकार सतगुरु से हो सकती है, कर्मकांडों से नहीं। इस मौके पर जवर सिंह, मोहित, ललित, सरिता, विवेक, चंद्रशेखर, रघुवीर सिंह, नन्ही देवी आदि ने भी विचार रखे।