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Pilibhit News: अभी शिकार के लायक नहीं शावक, कानपुर चिड़ियाघर का बना मेहमान

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कानपुर के चिड़ियाघर में पहुंचा शावक।
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मां से बिछड़कर नौ दिन से जंगल के बाहर डेरा जमाए था, रेस्क्यू वाहन से कानपुर ले जाया गया
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पीलीभीत। पूरनपुर क्षेत्र में खारजा नहर की झाड़ियों से रेस्क्यू कर पकड़ा गया बाघिन का शावक कानपुर चिड़ियाघर का मेहमान बन गया है। बृहस्पतिवार को उसे वन विभाग की टीम ने पिंजरे में कैद किया था। आठ से नौ माह की उम्र होने के कारण वह अभी शिकार करने के लायक नहीं है।
29 नवंबर को जंगल से बाहर पूरनपुर क्षेत्र में शावक की मौजूदगी देखी गई थी। बृहस्पतिवार को अफसरों की मौजूदगी में टीम ने जाल की मदद से उसे सुरक्षित पकड़ लिया। माला रेंज के गढ़ा गेस्ट हाउस ले जाकर शावक के स्वास्थ्य की जांच की गई, जिसमें वह स्वस्थ निकला। उसकी उम्र आठ से नौ माह के बीच बताई जा रही है। देर रात पशु चिकित्सक डॉ. दक्ष गंगवार के नेतृत्व में वन विभाग की टीम शावक को लेकर कानपुर चिड़ियाघर के लिए रवाना हुई। शुक्रवार की सुबह कानपुर पहुंचने के बाद शावक को चिड़ियाघर में शिफ्ट कर दिया गया।
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आखिर कहां गई बाघिन, अफसर भी हैरत में
पीलीभीत। मां से बिछुड़कर आबादी क्षेत्र के निकट पहुंचे शावक को भले ही वन विभाग ने रेस्क्यू कर पकड़ लिया हो, लेकिन बाघिन को लेकर अभी कई सवाल उठ रहे हैं। आखिर आठ से नौ माह के शावक को छोड़कर बाघिन कहां चली गई? अफसर हैरान और परेशान होकर इस सवाल का जवाब तलाश रहे हैं।
29 नवंबर को शावक की मौजूदगी देखे जाने के बाद विभाग ने निगरानी शुरू कराई थी। माना जा रहा था कि शावक के आसपास बाघिन की भी मौजूदगी होगी, लेकिन कहीं कोई प्रमाण नहीं मिला। विशेषज्ञों का मानना है कि जन्म के बाद एक से डेढ़ साल तक बाघिन शावक को अपने साथ रखती है। बाघ से शावकों को बचाने के लिए अक्सर जंगल से बाहर की ओर शरण ले लेती है। शिकार करने के साथ ही शावक को अन्य गतिविधियां सिखाती है। परिपक्व होने के बाद ही शावक को अपने से दूर करती है। पकड़े गए शावक की उम्र सिर्फ आठ से नौ माह बताई जा रही है। बाघिन गई तो गई कहां, यह वन विभाग की भी समझ में नहीं आ रहा। डिप्टी डायरेक्टर नवीन खंडेलवाल का कहना है कि पीटीआर के पास ऐसा कोई यंत्र नहीं जिससे बाघिन को ट्रेस किया जा सके।
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बाघिन की तलाश में अभी लगे रहेंगे कैमरे
नहर क्षेत्र में शावक की निगरानी के लिए सात कैमरे लगाए गए थे। बृहस्पतिवार को रेस्क्यू के बाद शावक को पकड़कर कानपुर चिड़ियाघर भेज दिया गया, लेकिन बाघिन को ट्रेस करने के लिए अभी कैमरे लगाए रखने का निर्णय लिया गया है। वन अफसरों का मानना है कि हो सकता है कि बाघिन शावक की तलाश में यहां फिर आ जाए। लिहाजा अभी कुछ दिन कैमरे लगे रहेंगे।
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