महिला कोच में वकीलों के बैठने पर रेलवे पुलिस से विवाद हो गया। बाद में समझाबुझाकर मामले को रफा-दफा कर दिया गया।
पूरनपुर से रोजाना कई अधिवक्ता जिला मुख्यालय आते हैं। सोमवार को भी कई अधिवक्ता ट्रेन संख्या 52228 से पीलीभीत आ रहे थे। ट्रेन में पीछे की ओर दो-दो महिला कोच लगे होने पर अधिवक्ता गार्ड के समीप लगे कोच में जा बैठे। इस पर ट्रेन में सवार जीआरपी ने वकीलों से कोच में बैठने पर एतराज जताया।
वकीलों ने महिला कोच की सही जानकारी न होने की बात कही। इधर, ट्रेन के रेलवे स्टेशन पर पहुंचते ही जीआरपी एसओ राघवेंद्र प्रताप सिंह व आरपीएफ इंचार्ज नरेश मीणा के नेतृत्व में पहुंचे जवानों ने महिला कोच से उतर रहे लोगों की वीडियोग्राफी करनी शुरू कर दी। इस पर बार एसोसिएशन के पूर्व सचिव अरुण मिश्रा, शिव शर्मा और रेलवे पुलिस के बीच तनातनी शुरू हो गई।
वकीलों का कहना था कि रेलवे पुलिस द्वारा महिला कोच कभी गार्ड के पास वाला बताया जाता है तो कभी उससे आगे लगी बोगी को बताया जाता है। इसको लेकर असमंजस की स्थिति रहती है। कुछ दिन पहले ट्रेन के अंतिम सिरे से लगी दूसरी बोगी को महिला कोच बताकर चढ़ने से रोका गया था। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विवाद स्टेशन मास्टर कक्ष तक आ पहुंचा। यहां वार्ता के बाद मामले को रफा दफा कर दिया गया।
वकीलों ने मामले की शिकायत उच्चाधिकारियों से करने की बात कही। आरपीएफ नरेश मीणा ने बताया कि नियमानुसार महिला कोच को गार्ड के समीप लगाया जाता है। दो-दो कोच लगे होने से भ्रम की स्थिति होने से कुछ लोग महिला कोच में सफर कर रहे थे। इन सभी को दोबारा महिला कोच में सफर न करने को कहा गया।