नेपाल बार्डर पर एक बार फिर विवाद की स्थिति बन गई है। हजारा के रास्ते केरल में मजदूरी पर जाने के लिए निकले छह नेपाली युवकों को टिल्ला नंबर चार निवासी कुछ लोगों ने शनिवार को बंधक बना लिया, जिससे हालात तनावपूर्ण बन गए। सूचना मिलने पर नेपाल और हजारा थाने की पुलिस मौके पर पहुंची। बंधक बनाए गए नेपालियों को छुड़ाया गया। रविवार को पूर्व जिपं अध्यक्ष गुरदयाल सिंह के आवास पर दोनों देशों के सीमावर्ती गांव के लोगों की बैठक की गई। जिसमें दोनों पक्षों के लोगों ने अपनी-अपनी गलती स्वीकार करते हुए आगे विवाद न होने पर सहमति तो व्यक्त कर ली, लेकिन सीमा पर व्याप्त तनाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हो सका है। खास बात यह है कि इतना सब कुछ हो जाने के बाद भी घटना की सूचना से पुलिस के आला अधिकारी अपने को अनभिज्ञ बता रहे हैं। बात करने पर पता चला कि सात मई को टिल्ला नंबर चार के दो युवकों के नेपाल जाने पर वहां के युवकों ने दोनों की जमकर पिटाई कर दी थी, जिन छह युवकों को टिल्ला नंबर चार के लोगों ने बंधक बनाया वह उन्हीं युवकों में से हैं, जिन्होंने सात मई को उनसे मारपीट की थी।
एसओ हजारा इंद्रकुमार ने बताया कि शनिवार को नेपाल पुलिस की ओर से फोन आया कि टिल्ला नंबर चार निवासी एक पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष के रिश्तेदारों ने नेपाल से केरल मजदूरी करने जा रहे छह युवकों को बुरी तरह मारा पीटा है और बंधक बना लिया है। एसओ ने इस पर कंबोज नगर चौकी पुलिस पर तैनात दरोगा पुष्कर गंगवार को घटना की जानकारी देने के साथ उन्हें बंधक बनाए गए युवकों को मुक्त करा चौकी लाने को कहा। वह भी चौकी के लिए फोर्स के साथ रवाना हुए। चौकी इंचार्ज इस बीच नेपाली युवकों को बंधनमुक्त करा चौकी ले आए थे। उन्हें बंधक बनाने के आरोपी युवकों को भी चौकी बुला लिया गया। इस बीच नेपाल पुलिस भी चौकी पहुंच गई। एसओ ने बताया कि शनिवार देर शाम बंधक बनाए गए युवकों को नेपाल भेज दिया गया और उसी दौरान दोनों पक्ष के लोगों ने रविवार को बैठक करने का निर्णय लिया। रविवार को भी नेपाल पुलिस के साथ नेपाल के सीमावर्ती गांव के तमाम संभ्रांत लोग व टिल्ला नंबर चार के संभ्रांत लोग पूर्व जिपं अध्यक्ष के आवास पर जमा हुए व वार्ता शुरू हुई। एसओ ने बताया कि इस दौरान टिल्ला नंबर चार निवासी दो युवकों ने बताया कि वह सात मई को नेपाल लेबर की तलाश में गए थे। जहां नेपाली युवकों ने उनकी बुरी तरह पिटाई की थी। इसकी उन्होंने नेपाल पुलिस से शिकायत भी की थी। नेपाल पुलिस ने उनका मेडिकल भी कराया था, लेकिन मात्र चार आरोपियों को मारपीट की धारा में चालान कर कर्तव्यों की इतिश्री कर ली थी। उनका कहना था कि जिन छह नेपाली युवकों को उन्होंने पकड़ा है, वह भी घटना में शामिल थे, पर उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। बंधक बनाए गए नेपाली युवकों का कहना था कि दोनों युवक रात में नेपाल में जाकर वहां शराब पीकर महिलाओं पर अभद्र टिप्पणी कर रहे थे, इसलिए उनके साथ मारपीट की गई थी। नेपाली युवकों ने दोनों युवकों के साथ की गई मारपीट पर खेद जताया। बाद में तय हुआ कि सीमावर्ती गांव के लोग एक दूसरे के क्षेत्र में आते-जाते रहते हैं। भविष्य में इस तरह का विवाद नहीं होना चाहिए। इस पर बैठक में मौजूद दोनों देशों के सीमावर्ती गांवों के संभ्रांत लोगों ने तय किया कि आगे इस तरह की गल्तियां नहीं होंगी।
विवाद सुलझा पर तनाव बरकरार
दोनों देशों के सीमावर्ती गांव के कुछ लोगों ने मिल बैठकर भले ही इस विवाद का निपटारा कर लिया हो, लेकिन क्षेत्र में तनाव का माहौल खत्म नहीं हो सका है। सीमा पर पहले की तरह आवाजाही नहीं हो रही है।
अफसरों को नहीं दी गई जानकारी
भले ही हजारा पुलिस दोनों देशों के लोगों की पंचायत कराकर विवाद निस्तारण का दावा कर रही है। आपसी गिले शिकवे दूर कराने की बात कह रही है, लेकिन पुलिस की गंभीरता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मामला दो देशों के बीच का होने के बावजूद किसी तरह की कोई सूचना अधिकारियों को नहीं है। यह हाल तब है जब कुछ दिन पहले भी इस तरह का एक मामला सामने आ चुका है। जिससे बार्डर पर हालात तनावपूर्ण हुए थे। नेपाली लड़की को प्रेमी के घर से जबरन उठा ले जाने का मामला हो या फिर लेबर लेने गए युवकों से मारपीट अथवा नेपाली युवकों को बंधक बनाने का। सभी मामले बार्डर की सुरक्षा पर सवाल खड़े करते हैं। अपर पुलिस अधीक्षक विकास कुमार वैद्य का कहना है कि उनको मामले की कोई सूचना ही नहीं दी गई है। घटना क्या हुई डर कहां पंचायत हुई इस बारे में
उनको कोई जानकारी नहीं है।