शुक्रवार को मदरसे में नमाज पढने को लेकर शाहगढ़ में दो समुदायों के बीच हुए पथराव, फायरिंग की घटना के बाद तीसरे दिन भी गांव के हालात सामान्य नहीं हो सके। हालांकि सीओ व एसडीएम ने गांव के कुछ लोगों से वार्ता कर स्थिति को सामान्य करने की कोशिश की।
इस मामले में पुलिस द्वारा दर्ज किए गए 140 लोगों के खिलाफ हत्या प्रयास व बलवे के मुकदमे तथा घटना के दिन हिरासत में लिए गए सभी 12 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजे जाने के जाने के बाद से एक समुदाय के लोगों में पुलिस के प्रति पैदा भय तीसरे दिन भी नहीं निकल सका। जिसके चलते इस समुदाय के अधिकांश पुरुष अभी भी भय के कारण अभी भी अपने रिश्तेदारों व परिचितों के यहां ही शरण लिए हुए हैं।
इसके अलावा दूसरे समुदाय के लोग संख्या में कम होने के कारण घटना के बाद से भयभीत हैं। इस समुदाय की महिलाएं घटना के दिन से ही गांव से चली गईं थीं( वह भी अनहोनी के आशंका के मद्दे नजर गांव नहीं पहुंची हैं। गांव में पुलिस व पीएसी तो तैनात रही, लेकिन पुलिस वालों ने इधर आरोपियों की धरपकड़ के प्रयास रविवार को नहीं किए।
एसपी जेके शाही ने कहा कि प्रशासन स्थिति सामान्य करने के तेजी से प्रयास कर रहा है। उन्होंने बताया कि किसी भी निर्दोष के खिलाफ कोई कार्रवाई न करने के निर्देश स्थानीय पुलिस को दिए गए हैं।
विधायक ने पुलिस कार्रवाई को बताया बर्बरतापूर्ण
भाजपा विधायक रामसरन वर्मा ने शाहगढ़ (पूरनपुर) की घटना की कड़ी निंदा की और पुलिस कार्रवाई को बर्बरतापूर्ण बताया। भाजपा विधायक ने रविवार को चीनी मिल अतिथि गृह में पत्रकारों से वार्ता में कहा कि पुलिस ने राजनीतिक दबाव में ईद पर शाहगढ़ में प्रतिबंध लगा होने के बावजूद ध्वनि विस्तारक यंत्र के साथ नमाज पढ़वाकर एक नई परंपरा डलवा दी थी। विधायक ने कहा कि बाद में झगड़ा होने पर पुलिस ने ग्रामीणों को खदेड़ा और बर्बरता पूर्वक उनसे मारपीट की। विधायक ने पुलिस कर्मियों पर फायरिंग करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाएगी और दोषियों को दंडित कराया जाएगा।