जिला जेल के बंदियों से कथित सुविधा शुल्क लेकर उन्हें आराम फरमाने की छूट
देने का खेल यहां अभी जारी है। इसका खुलासा डीएम ओएन सिंह व एसपी जेके
शाही की अगुवाई में कई प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा मारे गए छापे में भी
उजागर हो गया। जेल अस्पताल के अभिलेखों में भर्ती दर्शाए गए 15 बंदियों के
स्थान पर मौके पर 30 बंदी मिले। डीएम ने इसे गंभीरता से लेते हुए जेल
अधीक्षक का जवाब तलब किया है।
शासन के निर्देश पर जिलाधिकारी और एसपी ने
रविवार सुबह जब कई अधिकारियों के साथ जेल में अचानक छापा मारे तो वहां
हड़कंप मच गया। डीएम ने जेल अस्पताल का निरीक्षण किया तो वहां 30 बंदी बेड
पर आराम फरमाते मिले। डीएम ने जब जेल रिकार्ड देखा तो अस्पताल में सिर्फ 15
मरीज भर्ती दिखाए गए थे।
अमर उजाला जेल में चल रहे इस गोरखधंधे की ओर
पहले ही इशारा कर चुका था, लिहाजा डीएम को माजरा समझते देर नहीं लगी।
उन्होंने जेल अधीक्षक से स्पष्टीकरण तलब किया है। अधिकारियों ने इसके अलावा
सभी बैरक, स्टोर, कैदियों के काम करने के स्थान, रसोईघर, खानपान व्यवस्था
आदि की व्यवस्था का भी निरीक्षण किया। इसमें सफाई और खान पान व्यवस्था ठीक
मिली। बंदियों की तलाशी में भी कुछ हासिल नहीं हुआ। निरीक्षण के बाद डीएम,
एसपी ने जेल अधिकारियों के साथ बैठक कर जेल के क्रियाकलापों की जानकारी ली।
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शासन के निर्देश पर सात बिंदुओं पर एसपी के साथ जेल का निरीक्षण
किया गया। साफ सफाई और खानपान व्यवस्था ठीक मिली। जेल अस्पताल में अधिक
कैदियों के मिलने पर जेल अधीक्षक से स्पष्टीकरण मांगा गया है। संतोषजनक
जवाब न मिलने पर आगे कार्रवाई की जाएगी।
- ओएन सिंह, जिलाधिकारी
जेल अधीक्षक ने दी सफाई
अस्पताल
में भर्ती 15 बंदियों में कुछ बुजुर्ग हैं। उनकी देखभाल और रात्रि में
पहरेदारी के लिए कुछ बंदियों को लगाया गया है। बंदियों को आराम फरमाने की
छूट देने की बात गलत है।
- विजय सिंह, जेल अधीक्षक
शासन से निरीक्षण को मिले थे सात बिंदु
- साफ सफाई
- बंदी की तलाशी
- बैरक और उसमें रखे सामान की तलाशी
- भोजनालय का निरीक्षण
- खाने की गुणवत्ता की जांच
- अस्पताल की व्यवस्थाएं
- बंदियों के भागने की संभावनाओं की जांच
कैसे होता है खेल
जेल
अस्पताल में बंदियों को अच्छी सुविधा के साथ भोजन की भी बेहतर व्यवस्था
रहती है। इन बंदियों को कोई काम भी नहीं करना पड़ता है। लिहाजा घर से
संपन्न बंदी जेल अस्पताल में भर्ती होने को व्याकुल रहते हैं। इसके लिए
काफी पैसा भी खर्च करने को तैयार रहते हैं। जेल प्रशासन के कुछ लोग ऐसे
बंदियों का फायदा उठाते हुए सुविधा शुल्क लेकर उन्हें अस्पताल में भर्ती
करा देते हैं।
दो माह पूर्व भी अस्पताल में
मौज-मस्ती करते मिले थे बंदी
पीलीभीत।
जिला अस्पताल में रविवार को जो सच सामने आया वह कुछ नया नहीं हैं। करीब दो
माह पहले भी देखने में ठीक-ठाक लगने वाले चार बंदियों को जिला अस्पताल में
भर्ती करा दिया गया था। जहां वह बंदी बेड पर मौजूद न रह कर मौज मस्ती करते
मिले थे।
एसपी को सूचना मिली थी कि जेल अस्पताल में इलाज के नाम पर
बंदी आराम फरमाते हैं। इसे एसपी ने गंभीरता से लेते हुए एएसपी सुधीर कुमार
सिंह को जांच के लिए कहा था। उस समय आठ अप्रैल को एएसपी के निरीक्षण में
चार बंदी बेड पर मौजूद नहीं थे और मौजमस्ती करते मिले थे। यही नहीं उनकी
सुरक्षा में लगाए गए पुलिस वाले भी रायफलें रखकर इधर-उधर घूमते मिले थे।
इस
पर एसपी ने चार सिपाहियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई भी थी। अमर उजाला
में इसकी प्रमुखता से सचित्र खबर छापे जाने के बाद संबंधित बंदियों की जिला
अस्पताल से आनन-फानन में छुट्टी कर संबंधित बंदियों को वापस जेल भेज दिया
गया था। इसके बाद से जेल से जिला अस्पताल भेजे जाने वाले बंदियों पर तो एक
सीमा तक अंकुश लग गया लेकिन जेल अस्पताल में यह खेल जारी रहा।