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गन्ने के खेत में मृत मिला तेंदुआ

Tue, 21 Feb 2017 11:00 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो पीलीभीत।
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तेंदुआ - फोटो : अमर उजाला
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पोस्टमार्टम में मौत का कारण स्पष्ट नहीं, विसरा सुरक्षित
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पिछले कई माह से क्षेत्र में दिख रही थी चहलकदमी
टाइगर रिजर्व के जंगल के निकट गन्ने के खेत में एक तेंदुआ मृत पाया गया। उसकी मौत तीन दिन पहले होने का अनुमान है। ग्रामीणों की सूचना पर पहुंची वन विभाग की टीम ने मृत तेंदुआ कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए आईवीआरआई बरेली भेजा है। पोस्टमार्टम में मौत का कारण स्पष्ट न होने से चिकित्सकों ने विसरा सुरक्षित कर लिया है।
न्यूरिया थाना क्षेत्र के बरी गांव के कई मजदूर मंगलवार सुबह वहीं के रामकुमार के खेत में गन्ने छीलने गए थे। गन्ने के खेत से बदबू आने पर उन्होंने जाकर देखा तो एक तेंदुए मृत पड़ा था। ग्रामीणों ने इसकी सूचना वनविभाग को दी। इससे टाइगर रिजर्व के डीएफओ कैलाश प्रकाश व सामाजिक वानिकी के डीएफओ आदर्श कुमार, एसडीओ केपी सिंह, रेंजर गजेंद्र सिंह टीम के साथ मौके पर जा पहुंचे। वनकर्मियों ने मृत तेंदुआ खेत से बाहर निकाला और उसका परीक्षण किया। तेंदुए के सभी अंग सुरक्षित मिले। उसके शरीर पर चोट के निशान भी नहीं थे। प्राथमिक परीक्षण के बाद वनविभाग ने पोस्टमार्टम कराने को शव आईवीआरआई बरेली भेज दिया। 
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जहर या बीमारी से मौत की आशंका
गन्ने के खेत में मिले तेंदुए के सभी अंग सुरक्षित हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है। कयास लगाए जा रहे हैं कि तेंदुए की मौत किसी का जहरीला मांस खाने या फिर किसी बीमारी से हुई होगी। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि विसरा परीक्षण के बाद ही मौत का कारण स्पष्ट हो सकेगा। 

गन्ने के खेत में तेंदुए का शव मिला है जो करीब तीन-चार दिन पुराना लग रहा है। प्राथमिक परीक्षण में उसकी उम्र करीब तीन साल लगती है। पोस्टमार्टम में मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है। लैब में जांच के लिए विसरा सुरक्षित किया गया है। 
- आदर्श कुमार, डीएफओ सामाजिक वानिकी

कई माह से कर रहा था क्षेत्र में चहलकदमी
आसपास के कुत्ते और बकरियों को बनाया था निवाला
बरी गांव में गन्ने के खेत में मृत मिला तेंदुआ पिछले करीब पांच माह से क्षेत्र में देखा जा रहा था। बरी गांव के निकटवर्ती गांव में कई पालतू कुत्तों और बकरियों को इसने मार डाला था। इसके चलते किसान खेतों पर जाने से भी डरते थे।
टाइगर रिजर्व की महोफ रेंज से सटे क्षेत्र में बाघ और तेंदुए अक्सर देखे जाते हैं। मंगलवार को मृत मिले तेंदुए की बात करें तो करीब छह माह से क्षेत्र में इसकी चहल कदमी अक्सर देखी जा रही थी। करीब एक माह पूर्व 12 जनवरी की रात को न्यूरिया थाना क्षेत्र के ही पंडऱी गांव में घुसकर तेंदुए ने राममूर्ति के पालतू कुत्ते को मार डाला था। शोर मचाने पर तेंदुआ कुत्ते का शव छोड़कर भाग गया था। इसके बाद करीब 15 दिन पूर्व इसी क्षेत्र के गांव मानपुर निवासी मोहनलाल के घर में घुसकर बकरी को निवाला बना लिया था। दोनों घटनाओं की सूचना पर वनविभाग की टीम मौके पर पहुंची थी साथ ही बकरी के मरने पर मुआवजा देने की तैयारी भी चल रही है।
  निगरानी होती तो बच सकती थी जान
गांव पंडऱी और मानपुर में पालतू पशुओं पर हमले के बाद वनविभाग की टीम मौके पर पहुंची थी। वन विभाग के अधिकारियों ने दोनों ही घटनाओं के बाद इसकी निगरानी के दावे किए थे लेकिन माधोटांडा क्षेत्र में बाघ के आतंक में व्यस्तता और स्टाफ की कमी के चलते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया जिसका परिणाम तेंदुए की मौत के रूप में सामने आया। यदि तेंदुए की वास्तविक निगरानी की जाती तो शायद उसे बचाया जा सकता था।

टाईगर रिजर्व में बाघ के बाद कम हो गया तेंदुआ
11 फरवरी को पकड़ा गया था नरभक्षी बाघ
 बाघ एवं इसकी प्रजातियों को सुरक्षित करने के लिए पीलीभीत के जंगलों को टाईगर रिजर्व का दर्जा दिया गया था। यहां 10 दिन पहले एक नरभक्षी बाघ पकड़ा गया था। अब एक तेंदुआ की मौत हो गई। इससे टाईगर रिजर्व में इनकी संख्या कम हो गई है।
नौ जून 2014 को घोषित हुए टाइगर रिजर्व में बाघों के साथ अन्य वन्यजीवों की संख्या में बढ़ोत्तरी की संभावनाएं व्यक्त की जा रही हैं। वर्तमान में चल रही गणना में इसके संकेत मिल रहे हैं। बाघों की संख्या बढ़ने से एक ओर वन विभाग के साथ वन्यजीव एवं पर्यावरण प्रेमी खुश हैं, वहीं दूसरी ओर जंगल से सटे लोगों के लिए ये समस्या बन रहे हैं। पिछले 10 दिन में बाघ और तेंदुए के कम होने से वन्यजीव प्रेमियों को झटका लगा है। माधोटांडा थाना क्षेत्र में छह लोगों को मौत के घाट उतारने वाले नरभक्षी बाघ को वन विभाग की टीम ने 11 फरवरी को पकड़ने के बाद चिड़ियाघर भेज दिया था। इसके ठीक 10 दिन बाद 21 फरवरी को महोफ रेंज के निकट गन्ने के खेत में तेंदुए का शव मिला है।
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टाइगर रिजर्व बनने के बाद चौथी मौत
टाइगर के संरक्षण के लिए करीब ढाई साल पूर्व घोषित हुए टाइगर रिजर्व में यह चौथी मौत है। इससे पहले तीन बाघों की मौत को चुकी है। नौ जून 2014 में टाइगर रिजर्व बनने के बाद 16 अक्तूबर 2014 को सुरई और महोफ रेंज की सीमा के निकट कंपार्टमेंट 105 में शावक का शव मिला था जिसकी मौत आपसी संघर्ष में होना पाया गया था। इसके बाद 23 अप्रैल 2015 को माधोटांडा के निकट हरदोई ब्रांच में बाघ का शव मिला था। इसके बाद वनविभाग ने गभिया सहराई के दुलाल के साथ अपराधियों को पकड़ा था, जिन्होंने 2014 के नवरात्रि के समय फैजुल्लागंज में बाघिन की हत्या करने की बात स्वीकार की थी। तीन बाघों की मौत के बाद अब तेंदुए की मौत हुई है। इसे मिलाकर बाघ प्रजाति की यह चौथी मौत है।
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