नेपाल में बाघ की खाल के साथ तस्कर दुलाल के पकड़े जाने के बाद वन विभाग, एसटीएफ और वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (डब्ल्यूसीसीबी) की टीम हरकत में आई। संयुक्त कार्रवाई करते हुए शनिवार को वन विभाग ने दो लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। वनकर्मियों ने उनके कब्जे से भी वन्यजीव जंतुओं के अंगों की बरामदगी होने का दावा किया था। टीम ने इन दोनों के बताने पर रविवार को ही करीब एक दर्जन लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी थी। रविवार को वन कर्मियों ने छह और लोगों को शिकारी बताते हुए जेल भेज दिया। एसडीओ डीपी सिंह ने बताया कि एसटीएफ की जांच में वनविभाग ने गुलाबटांडा निवासी चिरौंजीलाल, उसके पुत्र रविंद्र कुमार, मटैइयालालपुर निवासी निताई गाइन और पताबोझी निवासी ओमप्रकाश, बाबा उर्फ लीला और गंगाराम को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में शिकारियों ने बराही रेंज के नवदिया कंर्पाटमेंट नंबर 72 व 74 में बाघ की हत्या करना स्वीकार है।
सवालों के घेरे में वनविभाग का खुलासा
पीलीभीत। नेपाल में तस्कर के पकड़े जाने के बाद आनन फानन में कार्रवाई कर दो दिन में आठ शिकारियों को जेल भेज दिया। विभाग की इस कार्रवाई से अफसरान भले ही अपनी पीठ थपथपा रहे हों लेकिन इस खुलासे ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकारियों को जेल भेजने तक विभाग बाघ की हत्या का स्थान स्पष्ट करने से कतराता रहा। विभाग ने शिकारियों द्वारा जंगल में एक साल पहले हत्याएं करने की बात स्वीकार की है। ऐसे में सवाल उठता है कि बाघ की हत्या के बाद एक साल तक वन विभाग के अधिकारियों को इसकी भनक क्यों नहीं लग सकी। शिकारियों ने बाघ की हत्या व उसके अंग निकालने के लिए किसी न किसी औजार का इस्तेमाल जरूर किया होगा? लेकिन पुलिस को उनके कब्जे से ऐसा औजार क्यों नहीं मिला? यह भी खुद में एक सवाल है कि नेपाल में शिकारी दुलाल के पकड़े जाने के बाद से ही वन विभाग हरकत में आया और आठ लोगों को जेल भेज दिया। इससे पहले वन विभाग को इनकी भनक क्यों नहीं लगी। दुलाल को भी वन विभाग क्यों नहीं पकड़ सका।