पुलिस कस्टडी में शकील और सद्दाम की मौत के मामले की विवेचना में लापरवाही बरती जा रही है। शायद यही वजह है कि घटना के सात दिन बीत जाने के बाद भी विवेचना अभी तक शुरू नहीं हो सकी है। विवेचना कब शुरू होगी। कब हत्यारोपियों की गिरफ्तारी होगी और कब पीड़ित पक्ष को न्याय मिल सकेगा आदि को लेकर पीड़ित परिवार वालों में रोष है।
पूरनपुर देहात के मोहल्ला रजागंज निवासी शकील अहमद और सद्दाम को पुलिस ने 30 मार्च की शाम को चोरी करने के आरोप में घर से उठाया था। पुलिस ने सद्दाम और शकील से मादक पदार्थ की बरामदगी दिखाकर दोनों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की। दोनों युवकों की बृहस्पतिवार सुबह हवालात में हालत बिगड़ने से मौत हो गई। घटना के विरोध में आक्रोशित लोगों ने कोतवाली का घेराव कर धरना-प्रदर्शन किया। एसपी ने कोतवाल शक्ति सिंह, संतरी पहरा और कार्यालय में तैनात मुंशी को निलंबित कर दिया था, जबकि नगर चौकी इंचार्ज आरके पांडेय को लाइन हाजिर कर दिया था। पुलिस ने मृतक सद्दाम की पत्नी शबीना की ओर से कोतवाल शक्ति सिंह, एसआई शकील अहमद, राजेश मौर्या, कांस्टेबिल मलिक, कश्मीरुल, फईम, सीएचसी के डॉ. अभिनव पांडेय और छह-सात अन्य पुलिस कर्मियों के खिलाफ हत्या कर साक्ष्य मिटाने, षड़यंत्र करने की रिपोर्ट दर्ज की थी। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद से ही कोतवाल शक्ति सिंह, दरोगा शकील, राजेश मौर्या, कांस्टेबिल मलिक, फईम, कश्मीरुल फरार हो गए। पहले इस मामले की विवेचना शुरू में दियोरिया कोतवाल सिकंदर यादव को सौंपी गई। अभी उन्होंने मामले की जांच भी शुरू नहीं की थी कि विवेचना सीओ जहानाबाद जेपी जोशी को दे दी गई। घटना के सात दिन बाद कोतवाली में प्रभारी कोतवाल की भी तैनाती कर दी गई, लेकिन अभी तक मामले की जांच शुरू नहीं हो सकी है। इसको लेकर पीड़ित पक्ष में रोष है।
पुलिस कस्टडी में दो युवकों की मौत पर दर्ज रिपोर्ट की विवेचना के अभिलेख बुधवार को ही प्राप्त हुए हैं। अभिलेखों का परीक्षण किया जा रहा है। घटना स्थल का पहले के विवेचक ने ही निरीक्षण किया होगा। बृहस्पतिवार को पूरनपुर पहुंचकर विवेचना शुरू की जाएगी।
-जेपी जोशी, सीओ जहानाबाद